
कोटा. एसीबी न्यायालयने सोमवार को बारां जिले के शाहबाद थाने के तत्कालीन सीआई व दलाल को रिश्वतमामले ( Bribery Case ) में दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल का कठोर कारावास और 50 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया। सहायक निदेशक अभियोजन अशोक जोशी ने बताया कि 6 नवंबर 2004 को झालावाड़ जिले के भवानीमंडी निवासी रामस्वरूप मीणा ने कोटा एसीबी में मामला दर्ज करवाया। जिसमें उसने बताया कि रतनलाल नामक व्यक्ति ने उसके खिलाफ शाहबाद थाने में शिकायत दी। जिसमें उसने विद्युत कनेक्शन की डिमांड जमा कराने के संबंध में निर्धारित से ज्यादा राशि उसके द्वारा वसूलने की रिपोर्ट दी थी।
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शिकायत के संबंध में रामस्वरूप को शहजाद नामक व्यक्ति ने फोन पर बताया कि पुलिस तुम्हें गिरफ्तार करने वाली है। गिरफ्तारी से बचना है तो 30 हजार रुपए सीआई के लिए दे दो। इस पर उसने शाहबाद थाना सीआई अब्दुल हक से फोन पर बात की। सीआई ने उसे गिरफ्तार नहीं करने व केस समाप्त करने की एवज में रिश्वत की मांग की और इस संबंध में अपने एजेंट शहजाद खान से बात करने को कहा। उसने शहजाद से बात की, तो उसने सीआई अब्दुल हक के लिए 30 हजार रुपए रिश्वत की मांग की। इसके बाद उसने कोटा एसीबी में शिकायत दर्ज कराई।
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एसीबी ने मामले का सत्यापन करवाने के बाद 19 नवंबर 2004 को आरोपी को 10 हजार रुपए की राशि रिश्वत के रूप में शहजाद अली को देते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में शहजाद ने यह राशि रामस्वरूप मीणा के खिलाफ थाना शाहबाद में दर्ज मामले को समाप्त करने की एवज में सीआई अब्दुल हक के लिए लेना कबूल किया।
कोटा एसीबी ने जांच में दोनों को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ 18 नवंबर 2006 को न्यायालय में चालान पेश किया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 18 गवाहों के बयान कराए गए। कोटा एसीबी न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए दोषी पुलिसकर्मी व दलाल को 5-5 साल की कठोर कारावास व 50 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।