
कोटा. शहर की सड़कें ही नहीं छतें भी लोगों के लिए सुरक्षित नहीं है। सड़कों पर जहां गहरे गड्ढे मौत का कारण बन रहे हैं वहीं, हवा में उड़ रहे तलवार से भी तेज धार लोगों की जान लेने पर तुली है। आए दिन परिदें इनकी जद में आ रहे हैं। सरेबाजार अचानक तेज धार से शहरवासी घायल हो रहे हैं। ट्रैफिक के बीच ऐसी घटना से जान पर संकट बना हुआ है। गत वर्ष भी इस तरह की कई घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन प्रशासन कार्रवाई के बजाए आंखें मूंदे हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
मकर संक्रांति पर्व नजदीक है। इसी के चलते शहर में एक बार फिर चायनीज मांझे की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। इस जानलेवा मांझे पर रोक नहीं होने से दुपहिया वाहन चालकों व पैदल राहगीरों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। ऐसा ही एक वाक्या शनिवार को गुमानपुरा क्षेत्र में हुआ जहां बाइक सवार एक व्यापारी की चायनीज मांझे से गर्दन की दो नसें कट गई। हालांकि समय पर उपचार मिलने से उसकी जान बच गई।
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चायनीज मांझे के शिकार पाटनपोल निवासी दीपक विजय के भाई हरीश विजय ने बताया कि दीपक बाइक से दादाबाड़ी अपने बच्चों को ट्यूशन छोड़कर गुमानपुरा ऑफिस आ रहा था। सिंधी कॉलोनी के नजदीक चायनीज मांझे की डोर से उसकी गर्दन की दो नसें कट गई। जिससे वह नीचे गिर गया जिसे आसपास के लोगों ने संभाला। बाद में सूचना पर दीपक को पहले दादाबाड़ी तथा बाद में सुभाष नगर स्थित एक निजी अस्पताल लेकर गए जहां चिकित्सक आशीष लड्डा ने ऑपरेशन किया।
चायनीज मांझा विके्रताओं के खिलाफ हो कार्रवाई
लोगों ने बताया कि शहर के कई इलाकों में पतंगों की दुकानों पर चायनीज मांझा बेरोकटोक बिक रहा है। प्रशासन को चाहिए कि प्रतिबंद के बावजूद चायनीज मांझा बेचने वालों पर छापेमारी की कार्रवाई करें और मुकदमे दर्ज करें।
इसी साल 5 जनवरी को भी कटी थी गर्दन
इसी वर्ष 5 जनवरी को बालिता रोड निवासी राकेश जैन भी चायनीज मांझे से घायल हो गए थे। वह सामान लेने के लिए घर से बाजार के लिए निकले थे, तभी नयापुरा चम्बल पुलिया पर चायनीज मांझे से उनकी गर्दन कट गई। अचानक हुए हादसे से जैन सहम गए। लोगों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया।