कोटा

बूंदी में चिटफंड कम्पनियों ने 57 हजार लोगों को लगाई 65 करोड़ की चपत, बर्बादी के कगार पर पहुंचे हजारों परिवार

chit fund companies, fraud, Cheat: मेहनत-मजदूरी कर एकत्र किया पैसा चिटफंड कम्पनियों में जमा कराया था। अब 57 हजार लोगों का 65 करोड़ रुपए उलझ गए।
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Sep 23, 2019
chit fund companies
बूंदी में चिटफंड कम्पनियों ने 57 हजार लोगों को लगाई 65 करोड़ की चपत, बर्बादी के कगार पर पहुंचे हजारों परिवार

बूंदी@ नागेश शर्मा. 'भरोसे में आकर मेहनत-मजदूरी कर एकत्र किया गांठ का पैसा जमा कराया था। अब जब इन कंपनियों में पैसा उलझ गया तो 24 साल की बेटी की शादी तक रुक गई। यह अकेली बूंदी की द्रौपदी बाई महावर की पीड़ा नहीं बल्कि 57 हजार लोग ऐसे हैं जो स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। ( Chit Fund companies ) इन लोगों के पीएसीएल, समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी परपज को-ऑपरेटिव सोसायटी एवं लोट्स एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव सोसायटी कम्पनियां निवेश के नाम पर झांसा देकर करोड़ों रुपए ऐंठकर ले गई। जिले में इन तीन कम्पनियों के पास ही 65 करोड़ रुपए उलझ गए। अब इन कम्पनियों में निवेश करने वाले और एजेंट दोनों के ही घर बिकने की नौबत आ गई। इन लोगों को कुछ नहीं सूझ रहा।

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कहां तक झूठ बोलूं साब
लोगों से निवेश कराने के बाद अब उनकी राशि वापस नहीं कराने की स्थिति में कई एजेंटों के सामने जीवन यापन करना मुश्किल हो गया। कई एजेंटों ने बताया कि कहां तक लोगों को झूठ बोलें। अब रास्ता रोककर लोग पूछते हैं कि पैसा कब आएगा। ऐसे में अब कोई जवाब नहीं रहा।

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कम्पनियों के दफ्तरों पर ताले
बूंदी में तीनों ही कम्पनियों के दफ्तर गायत्री नगर में हैं। इनमें अभी ताले लटके हुए हैं। कहीं कोई सूचना नहीं दी जा रही। ऐसे में सैकड़ों लोग इन कार्यालयों के रोज चक्कर काटने को मजबूर हैं।


पैसा नहीं मिला तो बर्बाद हो जाएंगे
रानीपुरा के सीताराम सैनी ने बताया कि पीएसीएल कम्पनी में 10 करोड़ रुपए जमा करवाए थे। अब क्या करें। कम्पनी के कार्यालयों पर ताले लग गए। सरकार कोई मदद करे। पैसा नहीं मिला तो बर्बाद हो जाएंगे।

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10 लाख रुपए डूब जाएंगे
बूंदी नगर परिषद की गली निवासी भूरसिंह हाड़ा ने बताया कि निजी स्कूल में पढ़ाकर कुछ पैसा एकत्र किया था। अन्य लोगों ने भी राशि जमा करा दी। अब सबके 10 लाख रुपए समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी परपज को-ऑपरेटिव सोसायटी में जमा हो गए। इन पैसों को लौटाने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा।

तीस लाख रुपए फंस गए
बूंदी की शिव कॉलोनी उंदालिया की डूंगरी निवासी देवीलाल नामा ने बताया कि ड्राइवरी का काम करता था। लोट्स एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव सोसायटी कम्पनी में निवेश के नाम पर झांसे में आ गया। कुल 30 लाख रुपए फंस गए। अब इस राशि को लौटाने के लिए सरकार मदद करे।

ऐसे लिया झांसे में
पीएसीएल कंपनी ने मजदूर, किसान और छोटे दुकानदारों को रीयल स्टेट कम्पनी के मार्फत झांसे में लिया। कम्पनी के प्रतिनिधि जमीन अलोट के नाम पर कम से एकमुश्त 10 हजार और प्रतिमाह दो किस्त के 120-120 रुपए लिया करते थे। इसके बदले निवेशकों को पॉलिसी बॉण्ड दिया जाता था। इसमें छह साल में राशि के दोगुनी होने का प्रलोभन था। इसी प्रकार समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी परपज को-ऑपरेटिव सोसायटी के नाम से पशु पालकों से भैंस, बकरी और जमीन के नाम पर राशि ली गई। यहां 5 साल 6 माह में राशि दोगुनी होने का झांसा दिया। इसी प्रकार लोट्स एगी्रकल्चर को-ऑपरेटिव सोसायटी कम्पनी ने पैसा लेकर जमीन विकसित करने का भरोसा दिया गया। निवेशकों को बताया गया कि उपज का निवेशक को पैसा देने का झांसा दिया। इस कम्पनी ने तो जमा राशि का दोगुना से अधिक पैसा देने की बात कही थी।

बूंदी में कब से जमा रखे पैर
पीएसीएल वर्ष 1995, समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी परपज को-ऑपरेटिव सोसायटी वर्ष 2009 एवं लोट्स एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव सोसायटी कम्पनी ने वर्ष 2010 में बूंदी में पैर जमाना शुरू कर दिया था। जिससे सैकड़ों लोग फंस गए।

Published on:
23 Sept 2019 03:58 pm