
कोटा. चमचमाता कमरा और साफ-सुथरी दिखने वाली बैडशीट असल में आंखों का धोखा है। मामला तो कुछ और ही है। कमरे को नीट एण्ड क्लीन रखने के बावजूद आपकी त्वचा पर एलर्जी, रेशेज और खुजली की प्रोब्लम क्यों होती है, कभी सोचा है बिस्तर की इतनी सफाई होने के बावजूद स्किन पर रेशें क्यों हो जाते हैं? और धीरे-धीरे आप कब अस्थमा के शिकार हो जाते हैं..., आपके जहन में उठते तमाम सवालों का जवाब देगी यह खास रिपोट...
बिस्तर पर इस्तेमाल किए जाने वाले कम्बल और तकिये आदि को दूसरे कपड़ों के साथ न धोएं। इससे बिस्तर की धूल कपड़ों में चली जाएगी जिससे स्किन एलर्जी, सोरायसिस प्रॉब्लम होने का खतरा बना रहता है। बिस्तर नियमित साफ न हो तो खटमलों का खतरा भी मंडराने लगता है। इसलिए सप्ताह में कम से कम दो बार बेड कवर और पिलो कवर जरूर बदलें। ऐसा नहीं करने पर अस्थमा, एक्जीमा और राइनिटिस होने का खतरा रहता है।
यदि बाल और स्किन से जुड़ी कोई परेशानी है तो सप्ताह में कम से कम तीन बार तकिये का कवर बदलना चाहिए। यदि कोई और आपके साथ बेड शेयर करता है तो उसे भी ये संकमण होने का खतरा बढ़ जाता है। बेड के पास ही एक मैट रखें, ताकि बिस्तर पर बैठने से पहले आप उस पर पैर पोंछ सकें। कई लोग बिस्तर पर बैठकर ही खाना खाने लग जाते हैं जो बेहद गलत आदत है। ऐसा करने से एक ओर जहां कवर तो गंदा हो ही जाता है, वहीं बिस्तर में छिपे बैक्टीरिया आपके खाने के साथ पेट तक पहुंच जाते हैं।
रसोई को रखें बाहर
आमतौर पर रसोईघर में इस्तेमाल की जाने वाली चीजों जैसे चाकू, तौलिया, सिंक, कूड़ेदान, दरवाजे के हैंडल, नल, बरतनों के स्टैंड वगैरह में कीटाणुओं के जमे रहने की सबसे ज्यादा आशंका रहती है। यदि आपका कमरा अटैच किचिन का हिस्सा है तो इन सभी जगहों की नियमित फिनाइल से क्लीनिंग करें।