Epidemic Red fever, Epidemic Red fever in India, Coronavirus, Covid-19, Corona Positive Case, lockdown : कोरोना वायरस संक्रमण ने आज से 100 साल पहले देश में एक और महामारी ने जमकर कहर बरपाया था। जिससे राजस्थान के कई गांव तबाह हो गए थे।
रामगंजमंडी. कोटा.कोरोना वायरस संक्रमण की चर्चा गांवों तक पहुंच गई है। गांव की चौपालों पर अब बुजुर्ग कोरोना के साथ लाल बुखार ( Red fever Epidemic ) का जिक्र कर रहे हैं और नई पीढ़ी को इसके बारे में बता रहे हैं। रीछडिय़ा ग्राम पंचायत हैड क्वार्टर पर स्थित माताजी मंदिर पर रोजाना ग्रामीण एकत्रित होते हैं और खेती-बाड़ी से लेकर सुख-दुख व राजनीति तक की बात करते हैं, लेकिन इन दिनों यहां चर्चा में कोरोना ही है। बुधवार को रीछडिय़ा में लगी इस चौपाल में दूरी बनाकर बैठे ग्रामीणाों को देखा तो लगा कोरोना से बचाव के लिए सोशल डिस्टेन्स का महत्व उन्हें पता है।
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फसल कटाई कर उसे घरों में संग्रहित करने व बेचने के लिए आढ़़तिए से बुलावा आने पर मंडी में जिंस बेचने से चौपाल पर चर्चा की शुरुआत हुई फिर कोरोना पर आ गई। हीरालाल राठौर का कहना था कि कोरोना को रोकने के लिए मंडी में आढ़तिए क्रमवार किसानों को जिंस लेकर बुला रहे हैं। ज्यादा़ भीड़ होने पर वायरस फैलने का ज्यादा खतरा रहता है। कोरोना से चालू हुई इस चर्चा र्में शोभाराम अहीर, भवानीशंकर माली, गिरिराज किराड़, छोटूलाल गुर्जर जुड़ गए। बुजुर्ग पुरीलाल भील ठाकुर (70)भी कहां चुप रहने वाले थे।
उजड़ गए थे गांव
पुरीलाल ने पुराने समय की यादों को ताजा करते हुए कहा कि उनके बुजुर्ग बताते थे कि सन 1918 में अकाल से पहले लाल बुखार महामारी आई थी। तब लोग बैठे रह गए थे। राजस्थान के रामगंजमंडी तहसील के रीछडिय़ा के आस-पास नया गांव, छतरपुरा, देवीपुर, जोधपुर बसे थे। लाल बुखार में इन गांवों के लोग या तो काल का गाल बन गए या पलायन कर गए। ऐसे में कई गांव उजाड़ हो गए। लाल बुखार में मरने वालों का अंतिम संस्कार तक नहीं हो पाया था। बुजुर्गाे की बातों को युवा ध्यान से सुनते तो बीच में चर्चा कोरोना से विदेशों में मरने वाले लोगों व संक्रमित लोगों तक का जिक्र आ जाता।
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महंगाई का जिक्र
महामारी की इन बातों के साथ किसान दुकानें बंद होने से गांवों में शक्कर तेल के भाव बढऩे का जिक्र करते हुए बीमारी से उनके गांव महफूज रहने पर संतोष व्यक्त करने से नहीं चूकते। किसान रबी फसल के बाद अब खरीफ फसल के लिए खेतों को तैयार करने की जुगत में लगे हुए हैं।