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Kota News: कोटा प्रसूता प्रकरण में बड़ी कार्रवाई, दो चिकित्सक-दो नर्सिंगकर्मी निलंबित, एक्शन मोड में भजनलाल सरकार

​​​​​Kota Maternal Deaths Case: कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत और स्वास्थ्य बिगड़ने के मामले में सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। जांच के बीच दो चिकित्सक और दो नर्सिंगकर्मी निलंबित किए गए हैं, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी हुआ है।

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कोटा

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Rakesh Mishra

May 12, 2026

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फाइल फोटो- पत्रिका

कोटा। कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत और स्वास्थ्य बिगड़ने के मामले को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच जारी है और लगातार जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में दो चिकित्सक और दो नर्सिंगकर्मी निलंबित किए गए हैं, जबकि जेके लोन अस्पताल और न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

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इनको किया निलंबित

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने सोमवार को कोटा पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी ली। मंगलवार को भी उन्होंने दिनभर विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की। इलाज और पर्यवेक्षण में लापरवाही सामने आने पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, न्यू मेडिकल कॉलेज कोटा के आचार्य डॉ. बद्रीलाल और सह आचार्य डॉ. खुशबू मीणा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। इसके साथ ही जेके लोन अस्पताल की नर्सिंग अधिकारी पिंकी खींची और न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल की नर्सिंग अधिकारी मीनाक्षी मीणा को भी निलंबित कर दिया गया है।

कारण बताओ नोटिस जारी

प्रशासनिक और पर्यवेक्षणीय स्तर पर लापरवाही मानते हुए जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा और न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल कोटा के अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। आगामी दो दिनों में एसओपी जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

दिए दिशा निर्देश

इसमें अस्पताल प्रक्रियाएं, ब्लड ट्रांसफ्यूजन और मरीजों के उपचार रिकॉर्ड को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाएगा। एसओपी लागू होने के बाद उसकी सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी चिकित्सकों और नर्सिंगकर्मियों को प्रशिक्षण देकर इन्हीं मानकों के अनुसार कार्य करने के लिए कहा गया है। मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार उपलब्ध कराया जाए।

प्रोटोकॉल की सख्त पालना अनिवार्य

आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और आपातकालीन इकाइयों में उपचार प्रोटोकॉल की सख्त पालना अनिवार्य की गई है। संक्रमण नियंत्रण, नियमित स्टरलाइजेशन, पोस्ट ऑपरेटिव मॉनिटरिंग और दवा वितरण प्रणाली में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। अधीक्षकों को रात्रिकालीन समय में भी अस्पताल का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि मरीज सुरक्षा और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। साथ ही मरीजों को दिए जाने वाले इलाज, दवा एवं ब्लड ट्रांसफ्यूजन आदि के नोट्स प्रोटोकॉल के अनुसार लिखे जाएं।