कोटा

आखिर ऐसा क्या हुआ कि डॉक्टर ने जड़ा तीमारदार को तमाचा

एमबीएस अस्पताल में डॉक्टर्स राउंड के दौरान तीमारदार व डॉक्टर में बहस इतनी बढ़ गई कि डॉक्टर ने तीमारदार को थप्पड़ जड़ दिया|  
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May 18, 2018
mbs hospital
आखिर ऐसा क्या हुआ कि डॉक्टर ने जड़ा तीमारदार को तमाचा

कोटा . एमबीएस अस्पताल के महिला मेडिकल वार्ड में गुरुवार दोपहर डॉक्टर्स राउंड के दौरान तीमारदार व डॉक्टर में बाहर जाने को लेकर बहस इतनी बढ़ गई कि डॉक्टर ने तीमारदार को थप्पड़ जड़ दिया। थप्पड़ के बाद परिजनों ने हंगामा कर दिया। बाद में विभागाध्यक्ष की समझाइश पर मामला शांत हुआ।


महिला मेडिकल वार्ड में विभागाध्यक्ष डॉ. दीप्ती शर्मा व अन्य रेजीडेंट व सीनियर डॉक्टर्स राउंड कर रहे थे। अस्पताल कर्मी एक नर्स ने भर्ती मरीज शकुरन के तीमारदारों को बाहर जाने के लिए कहा तो वे अपशब्द कहने लगे, इस पर कई चिकित्सकों ने उन्हें ऐसा नहीं करने के लिए कहा। इस दौरान दोनों पक्ष में बहस हो गई।

मामला बढ़ा तो डॉ. ज्ञान सिंह चौधरी ने तीमारदार लाडपुरा निवासी इरफान को तमाचा जड़ दिया। उसके बाद परिजनों ने हंगामा कर दिया। परिजन इस मामले की शिकायत लेकर अधीक्षक के पास गए, वहां से उन्हें विभागाध्यक्ष शर्मा के पास भेज दिया गया।

डॉ. शर्मा ने तीमारदार व डॉक्टर्स को बुलाया और समझाइश की। उसके बाद परिजनों द्वारा शिकायत नहीं दी गई। परिजनों का कहना है कि बाद में चिकित्सक ने माफी मांग ली और मामला शांत हो गया।


राउंड के दौरान परिजनों को कई बार बोलने के बावजूद बाहर नहीं जा रहे थे। ऐसे में ट्रेनिंग पर आए डॉक्टर की परिजन से बहस हो गई। इस बीच उन्होंने हल्के हाथ से मरीज को एक लगा दी लेकिन बाद में मामला निपट गया।
-डॉ. दीप्ति शर्मा, विभागाध्यक्ष मेडिसिन विभाग

मामला आया था लेकिन किसी ने भी लिखित शिकायत नहीं दी। उन्होंने आपसी सहमति से मामला सुलझा लिया।
-डॉ. नवीन सक्सेना, अधीक्षक

Published on:
18 May 2018 12:34 pm
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45 करोड़ की सड़क एक साल में दूसरी बार टूटी, गुणवत्ता पर सवाल यपाटन मार्ग पर करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 22.50 किलोमीटर लंबी सड़क एक वर्ष के भीतर दूसरी बरसात भी नहीं झेल पाई। सड़क एक साल में दूसरी बार क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार सुवासा, बाजड और जमीतपुरा गांव के बीच करीब 15 स्थानों पर डामर जगह-जगह से उखड़ गया है और गिट्टी बाहर निकलने लगी है। क्षतिग्रस्त सड़क पर पैचवर्क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शनिवार को सुवासा कस्बे में विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण विशेष रूप से रात्रि के समय वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अंधेरे में गड्ढे दिखाई नहीं देने से आए दिन दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से तत्काल पैचवर्क और सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, तालेड़ा से केशोरायपाटन तक सड़क निर्माण के लिए 45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण कार्य 15 अगस्त 2022 से शुरू हुआ था और इसे सितंबर 2023 तक पूरा किया जाना था, लेकिन सड़क के दोनों ओर लगभग डेढ़ मीटर पटरी निर्माण का कार्य अभी भी कई स्थानों पर अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर लगभग एक वर्ष पूर्व डामरीकरण किया गया था, लेकिन दिसंबर 2025 में सुवासा, बाजड और जमीतपुरा के बीच करीब 20 स्थानों पर सड़क उखड़ गई थी। उस समय संवेदक द्वारा पैचवर्क कर सड़क की मरम्मत की गई थी, लेकिन मरम्मत कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही। परिणामस्वरूप जुलाई 2026 में दूसरी बरसात शुरू होते ही सड़क फिर से उखड़ गई और कई स्थानों पर गिट्टी निकलने लगी है। लगातार टूट-फूट के कारण सड़क धीरे-धीरे बड़े गड्ढों में तब्दील होती जा रही है। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब तीन हजार से अधिक छोटे-बड़े व भारी वाहन गुजरते हैं। यह सड़क नेशनल हाईवे 52 व मेगा हाईवे को जोड़ती है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण वाहन चालकों, किसानों, मजदूरों और आसपास के गांवह/वें के लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। अभिषेक गुर्जर, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, तालेड़ा ने बताया कि तालेड़ा से सुवासा के बीच कुछ स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है और सड़क निर्माण का कुछ कार्य अभी शेष है। संवेदक का पूरा भुगतान अभी नहीं हुआ है। क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत करने के निर्देश संवेदक को दे दिए गए हैं। सड़क वर्तमान में गारंटी अवधि में है और इसकी मरम्मत संवेदक द्वारा ही कराई जाएगी।