कोटा

हरनावदा में चरागाह से हटाया अतिक्रमण

Aug 02, 2026
Rajasthan

ग्रामीणों की शिकायत पर कार्रवाई
डग. तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत हरनावदा में प्रशासन ने सरकारी चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। तहसीलदार के आदेशों की पालना में राजस्व विभाग, ग्राम पंचायत और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने भारी पुलिस जाब्ते की मौजूदगी में जेसीबी की सहायता से भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया।
ग्राम पंचायत हरनावदा ने पहले ही अतिक्रमणकारियों को 30 जुलाई तक स्वैच्छा से कब्जा हटाने का अंतिम नोटिस दिया था। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद शुक्रवार को कार्रवाई की। प्रशासन ने बताया कि ग्राम हरनावदा की सरकारी चरागाह भूमि खसरा संख्या 64 सहित अन्य चरागाह भूमि पर अवैध कब्जों की शिकायत ग्रामीणों ने की थी। कार्रवाई के दौरान भूमि का सीमांकन कर अवैध निर्माण एवं बाड़ों को हटाया तथा अतिक्रमणकारियों को भविष्य में दोबारा कब्जा नहीं करने की सख्त हिदायत दी। अधिकारियों ने कहा कि चरागाह भूमि सार्वजनिक संपत्ति है और इस पर अवैध कब्जा करना कानूनन अपराध है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद चरागाह भूमि स्थानीय मवेशियों के चरने एवं सार्वजनिक उपयोग के लिए पुनः उपलब्ध हो गई। कार्रवाई के दौरान ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, ग्राम सचिव, राजस्व अधिकारी, पुलिस बल तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

Updated on:
02 Aug 2026 06:01 am
Published on:
02 Aug 2026 06:01 am
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45 करोड़ की सड़क एक साल में दूसरी बार टूटी, गुणवत्ता पर सवाल यपाटन मार्ग पर करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 22.50 किलोमीटर लंबी सड़क एक वर्ष के भीतर दूसरी बरसात भी नहीं झेल पाई। सड़क एक साल में दूसरी बार क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार सुवासा, बाजड और जमीतपुरा गांव के बीच करीब 15 स्थानों पर डामर जगह-जगह से उखड़ गया है और गिट्टी बाहर निकलने लगी है। क्षतिग्रस्त सड़क पर पैचवर्क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शनिवार को सुवासा कस्बे में विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण विशेष रूप से रात्रि के समय वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अंधेरे में गड्ढे दिखाई नहीं देने से आए दिन दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से तत्काल पैचवर्क और सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, तालेड़ा से केशोरायपाटन तक सड़क निर्माण के लिए 45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण कार्य 15 अगस्त 2022 से शुरू हुआ था और इसे सितंबर 2023 तक पूरा किया जाना था, लेकिन सड़क के दोनों ओर लगभग डेढ़ मीटर पटरी निर्माण का कार्य अभी भी कई स्थानों पर अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर लगभग एक वर्ष पूर्व डामरीकरण किया गया था, लेकिन दिसंबर 2025 में सुवासा, बाजड और जमीतपुरा के बीच करीब 20 स्थानों पर सड़क उखड़ गई थी। उस समय संवेदक द्वारा पैचवर्क कर सड़क की मरम्मत की गई थी, लेकिन मरम्मत कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही। परिणामस्वरूप जुलाई 2026 में दूसरी बरसात शुरू होते ही सड़क फिर से उखड़ गई और कई स्थानों पर गिट्टी निकलने लगी है। लगातार टूट-फूट के कारण सड़क धीरे-धीरे बड़े गड्ढों में तब्दील होती जा रही है। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब तीन हजार से अधिक छोटे-बड़े व भारी वाहन गुजरते हैं। यह सड़क नेशनल हाईवे 52 व मेगा हाईवे को जोड़ती है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण वाहन चालकों, किसानों, मजदूरों और आसपास के गांवह/वें के लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। अभिषेक गुर्जर, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, तालेड़ा ने बताया कि तालेड़ा से सुवासा के बीच कुछ स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है और सड़क निर्माण का कुछ कार्य अभी शेष है। संवेदक का पूरा भुगतान अभी नहीं हुआ है। क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत करने के निर्देश संवेदक को दे दिए गए हैं। सड़क वर्तमान में गारंटी अवधि में है और इसकी मरम्मत संवेदक द्वारा ही कराई जाएगी।

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