
कोटा . खूबसूरत दिखने की चाहत लोगों को मौत के मुंह में धकेल रही है। रंग गोरा करने के नाम पर बाजार में खुलेआम बिक रहीं फेयरनेस क्रीमों के नाम पर धड़ल्ले से स्टेरॉयड बेचा जा रहा है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को खत्म करने के साथ ही ये क्रीमें त्वचा रोगों को लाइलाज बना रही हैं। आलम यह है कि फंगल इंफेक्शन में दी जाने वाली 5 में से 4 दवाएं अब बेअसर हो गई हैं।
कोटा के नए अस्पताल और एमबीएस समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में पिछले पांच महीने में ही त्वचा रोगों से संबंधित 34,745 मरीज पहुंचे। इनमें से 20,847 मरीज ऐसे थे, जो कैमिस्ट शॉप पर बिकने वाली दवाओं और क्रीम का इस्तेमाल कर अपनी त्वचा को बदरंग कर चुके थे। इनमें लड़कियों और नौजवान लड़कों की संख्या 70 फीसदी से ज्यादा है।
स्टेरॉयड बना मुसीबत
मेडिकल कॉलेज के सहायक आचार्य डॉ. अक्षय कुमार जैन बताते हैं कि बाजार में दाद-खाज जैसी बीमारियों को ठीक करने और खूबसूरत बनाने वाली अधिकांश क्रीमों में स्टेरॉयड इस्तेमाल किया जा रहा है। यह तात्कालिक तौर पर असर तो दिखाता है, लेकिन लंबे समय इस्तेमाल करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को खत्म करने के साथ ही चमड़ी को खराब कर देता है।
दवाएं हुईं बेअसर
हालत यह कि त्वचा रोग के इलाज में इस्तेमाल होने वाली वाली पांच में से चार दवाएं टर्बिनाफाइन, केटोकोनाजोल, फ्लूकेनाजोल और ग्रीसोफ्यूलविन अब ऐसे रोगियों पर असर ही नहीं कर रहीं। एकमात्र इंट्राकेनोजोल दवा ही थोड़ा बहुत असर दिखा रही है, लेकिन इसका कोर्स कम से कम 5 से 6 महीने का होता है और एक गोली की कीमत 300 रुपए से 500 रुपए के बीच पड़ती है। महंगी दवा और लंबे इलाज के कारण मरीज अक्सर इसे बीच में ही छोड़ देते हैं।
बचाव ही है इलाज
-फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल न करें।
- स्टेरॉयड युक्त दवाओं और क्रीम का इस्तेमाल न करें।
- कील मुंहासे या दाद खाज खुजली होने पर डॉक्टर की सलाह लें।
- ज्यादा टाइट कपड़े न पहनें, पसीना फंगल इन्फेक्शन पैदा करता है।
- दिन में दो से तीन बार नहाएं, साबुन का इस्तेमाल जरूर करें।
चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. सलिल मित्तल ने बताया कि झाइयों के मामले में हर रोगी इस तरह की क्रीम लगा चुका होता है। वहीं अन्य दूसरे चर्म रोगों में तीस फीसदी रोगी इस तरह की क्रीम लगा कर आते हैं। इससे चमड़ी पतली हो जाती है। नसें दिखने लगती हैं। यह नुकसान दीर्घकालिक होता है।