कोटा

BIG NEWS: सरकार के तीर से फिर घायल हुआ हाड़ौती का अन्नदाता, कर्ज माफी से पहले मांग लिया ब्याज

राज्य सरकार ने चुनावी साल में किसानों के लिए कर्ज माफी योजना तो लागू कर दी, लेकिन क्रियान्विति में सरकारी देरी किसानों के लिए गलफांस बन गई है।
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May 31, 2018
garlic farmers

कोटा . राज्य सरकार ने चुनावी साल में किसानों के लिए कर्ज माफी योजना तो लागू कर दी, लेकिन क्रियान्विति में सरकारी देरी किसानों के लिए गलफांस बन गई है। किसानों ने माफी के फेर में ऋण राशि जमा नहीं कराई, इस कारण उन्हें अवधिपार ऋणी की श्रेणी में डाल दिया गया है। नतीजा यह कि किसानों को खरीफ फसली ऋण वितरण योजना -2018 का लाभ नहीं मिलेगा। मसला अब राज्य सरकार तक पहुंच गया है।

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प्रदेश में 26 और 28 मई को ऋण माफी शिविर लगाए गए थे, लेकिन 'अवधिपार जैसे नियमों की विसंगतियों के कारण ज्यादातर किसान निराश लौटे। कोटा जिले में 57 हजार ऋणी किसान हैं, 42 हजार किसानों को योजना में लाभान्वित होना है। लेकिन, माफी की घोषणा होने पर किसानों ने राशि जमा नहीं कराई, इससे वे अवधिपार हो गए। अब कर्ज माफ करने से पहले उनसे 7त्न ब्याज वसूला जाएगा।

ऐसे फंसे चक्र में
खरीफ फसली ऋण-2017 की राशि जमा कराने की तिथि 31 मार्च थी। इसे सरकार ने बढ़ाकर 30 जून 2018 ( या ऋण लिए जाने से 364 दिन पहले, जो भी पहले हो) तक कर दी। लेकिन, अप्रेल और मई 2017 में वितरित ऋण अविधपार हो चुके हैं। हाड़ौती में ही 60 फीसदी किसान अवधिपार हो चुके हैं।

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राजस्थान राज्य सहकारी बैंक के पूर्व निदेशक बृजमोहन शर्मा ने बताया कि सरकार ने यदि सहकारी बैंकों को वांछित राशि उपलब्ध करवाए बिना कर्ज माफी की राशि किसानों के खाते में जमा कर दी तो यह बैंकों के लिए घातक होगा।

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कोटा केन्द्रीय सहकारी बैंक के प्रबंधक बलविन्दर सिंह गिल ने बताया कि अन्य जिलों के मुकाबले अवधिपार ऋणी किसान कोटा में कम हैं। किसानों पर 7 प्रतिशत ब्याज नहीं लगे, इसलिए प्रकरण राज्यस्तरीय कमेटी को भेज दिया है।

Published on:
31 May 2018 12:22 pm