
रावतभाटा. उपखंड के मत्स्य विभाग ने अब प्रदेश के कई जिलों में मछलियों का उत्पादन बढ़ाने के लिए सप्लाई देना शुरू कर दिया है। यहां सालाना करीब 10 करोड़ मछली के बच्चे (स्पोन बीज) का उत्पादन होता है। इनमें से करीब 5 करोड़ बीज प्रदेश के अन्य जिलों के मत्स्य विभाग भेजे जाते हैं, जिससे वहां भी मछली उत्पादन बढ़ सके। इसके अलावा करीब ढाई करोड़ बीजों को बेच जाता है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यहां पर उत्पादन केन्द्र बना हुआ है। जुलाई व अगस्त में मछली के बीजों का उत्पादन किया जाता है। यहां बने तालाब में अभिजन मछलियां हैं। मछलियों को इंड्यूड ब्रीडिंग तकनीक से (इंजेक्शन लगाकर) बीज उत्पादन किया जाता है। तीन दिन में मछली के बीज निकलना शुरू हो जाते हैं। फिर आधे बीजों को प्रदेश के अन्य कार्यालयों में भेजा जता है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पांच साल पहले मात्र हाड़ौती में बीजों की सप्लाई दी जाती थी लेकिन उत्पादन बढ़ गया है, जिससे प्रदेश के अन्य जिलों में भी सप्लाई देना शुरू कर दिया है।
यहां भेजे जाते हैं बीज
ये बीज भीलवाड़ा, कोटा, बारां, बांसवाड़ा, सवाई माधोपुर, करौली, सिरोही, जयपुर, बूंदी, झालावाड़, चितौडगढ़़, उदयपुर, डूंगरपुर, पाली आदि जगहों पर भेजे जाते हैं। 5 करोड़ बीजों को ऑक्सीजन नुमा पॉलीथिन में पैक करके उक्त जगहों के मत्स्य विभाग के कार्यालयों में भेजा जाता है। बाकी बचे ढाई करोड़ बीजों को तालाब में डाल दिया जाता है, जिससे उनका पालन किया जाता है।
2 लाख रुपए मासिक आय
मत्स्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाकी बचे ढाई करोड़ बीजों को बेचा जाता है, जिससे विभाग को प्रत्येक माह 2 लाख रुपए की आय होती है। स्थानीय और आसपास के अलावा मध्यप्रदेश के मंदसौर, नीमच के कृषक भी मछली के बीज खरीदने आते हैं।
तीन दिन का प्रशिक्षण
विभाग की ओर से साल में एक बार लगभग 50 कृषकों को अक्टूबर से जनवरी के बीच मछली उत्पादन व पालन का प्रशिक्षण दिया जाता है। यह तीन दिन का प्रशिक्षण होता है, जिसमेंं कृषकों को मछली उत्पादन करने व उत्पादन को कैसे बढ़ाया जाए। इसके बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है।
रावतभाटा को उत्पादन केन्द्र बनाया गया है। यहां करीब 10 करोड़ मछली के बीजों का उत्पादन होता है। इनमें से आधे बीज प्रदेश के कई मत्स्य विभाग को सप्लाई किए जाते हैं। इसके अलावा काफी बीजों को बेचा जाता है।
इरशाद खान, विकास अधिकारी, मत्त्य विभाग, रावतभाटा