नगर निगम की ओर से घर-घर कचरा एकत्र करने के लिए संचालित किए गए टिपरों में बड़ा घालमेल सामने आया है।
कोटा . नगर निगम की ओर से घर-घर कचरा एकत्र करने के लिए संचालित किए गए टिपरों में बड़ा घालमेल सामने आया है। ठेकेदारों ने निगम के टिपरों को अपने खाते में संचालित करना दर्शा दिया। इसकी भनक लगने के बाद आयुक्त ने निगम के 33 टिपर वार्डों से मंगवा लिए हैं और ठेकेदारों का भुगतान रोक दिया है।
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केन्द्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम के लौटने के बाद आयुक्त ने स्वास्थ्य निरीक्षकों से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण में चल रहे टिपरों की रिपोर्ट मांगी थी। इसमें पाया कि ठेका फर्मों की ओर से शहर के तीनों जोन में 195 टिपर संचालित किए जा रहे थे। निगम ने 65 टिपर ठेकेदारों को 15 हजार रुपए मासिक किराये पर दे रखे थे।
ये टिपर भी वार्डों में संचालित हो रहे थे। इसके अलावा निगम के 33 टिपर केन्द्रीय टीम आने के दौरान विशेष अभियान के तौर पर लगाए गए थे। ये निगम के खर्चे पर संचालित हो रहे थे लेकिन कुछ वार्डों में ठेकेदारों ने इन टिपर को भी अपने खाते में दर्ज कर लिया और भुगतान के लिए फाइल निगम को भेज दी।
गोपनीय सूचना पर खुली पोल
आयुक्त को टिपरों में घालमेल की गोपनीय सूचना मिली थी। इसके बाद उन्होंने दो-तीन वार्डों में विशेष टीम भेजकर जांच करवाई। इसमें पाया कि ठेकेदारों ने निगम के टिपरों को अपने खाते में चलाना बता रखा है। इस पर आयुक्त ने सभी 33 टिपर अपने कब्जे में करवा लिया है। जिम्मेदार ठेकेदारों को नोटिस थमा दिए गए हैं।
निगरानी होगी
महापौर महेश विजय ने बताया कि टिपरों का सुचारू संचालन करने के लिए पुख्ता निगरानी की व्यवस्था की जा रही है। जीपीएस सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। ट्रैकिंग सिस्टम से निगरानी होगी, ताकि इस तरह की गड़बड़ी नहीं हो।