
Patrika Survey: राजस्थान के निकाय चुनाव में इस बार जेन-जी यानी युवा मतदाता हाईटेक मुद्दों की बात करने लगे हैं। इसके चलते कोटा समेत शहरी निकायों में इस बार पारंपरिक नाली-पटान, सड़क-सफाई से आगे डिजिटल नगर निगम, स्मार्ट वार्ड, एआइ मॉनिटरिंग, लाइव शिकायत ट्रैकिंग, स्मार्ट पार्किंग, सीसीटीवी कैमरों से लैस वाई-फाई वार्ड, ई-फाइल ट्रैकिंग सिस्टम और पर्यावरण सेंसर जैसे मुद्दों पर बात होने लगी है। प्रदेश में जेन-जी को लेकर राजनीतिक दलों का भी फोकस बढ़ा है। प्रदेश में कुल मतदाताओं में 21 लाख 30 हजार 43 युवा मतदाता हैं। यानी कुल वोटर्स के 14.7 फीसदी युवा हैं।
पत्रिका ने युवाओं से सीधा सवाल किया। शहरी निकाय में किस तरह के मुद्दे होने चाहिए और राजनीतिक दलों को अपने चुनावी घोषणा पत्र में इस हाईटेक युग में किस तरह के मुद्दों को शामिल करना चाहिए? पत्रिका ने इस सर्वे में 500 युवा मतदाताओं से बात की। सामने आया कि शिक्षा नगरी में बड़ी संख्या में युवा और विद्यार्थी रहते हैं। ऐसे में आगामी नगर निगम चुनाव में राजनीतिक दलों के सामने डिजिटल लाइब्रेरी, स्मार्ट मोबिलिटी, साइबर सुरक्षा, प्रदूषण मॉनिटरिंग और ऑनलाइन जवाबदेही जैसे नए मुद्दे होने चाहिए।
युवाओं का कहना है कि मोबाइल कैमरे से सड़क के गड्ढे की फोटो निगम ऐप पर अपलोड होते ही उसकी लोकेशन नगर निगम तक पहुंचे और एआइ के माध्यम से प्राथमिकता तय हो। इसी तरह जीपीएस से कचरा वाहनों की निगरानी हो और नागरिक मोबाइल पर देख सके कि उसके क्षेत्र में कचरा वाहन कब पहुंचेगा।
राजस्थान में निगम को मोबाइल ऐप सेवा शुरू करनी चाहिए। शहरवासी गंदगी और अतिक्रमण से जुड़ी शिकायतें मोबाइल ऐप के जरिए सीधे अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं। हर वार्ड और गली की जियो टैगिंग होनी चाहिए। जिसमें डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए टिपर कब आएगा, उसकी लोकेशन घर बैठे पता चल सके, यह सिस्टम लागू किया जाना चाहिए।
सफाई व्यवस्था : 65 % असंतुष्ट
65.4 % : सफाई से संतुष्ट नहीं
20.6 % : औसत सफाई
14 % : बेहतर कामकाज
अतिक्रमण : 75 % अतिक्रमण से परेशान
75 % : अतिक्रमण से परेशानी
25 % : काफी कम हुए हैं अतिक्रमण
निगम में पब्लिक रिस्पॉन्स: 65% बोले-सुनवाई ही नहीं होती
65 % : सुनवाई होती ही नहीं
30 % : कई चक्कर लगाने पड़ते हैं
5 % : सुनवाई से संतुष्ट
| आयु वर्ग | मतदाता | प्रतिशत |
| 18-25 | 2130043 | 14.7 |
| 26-35 | 3660211 | 25.40 |
| 36-50 | 4170693 | 29.00 |
| 51-59 | 2002199 | 13.9 |
| 60 व अधिक | 2440707 | 17.0 |
कोटा एजुकेशन सिटी है। स्टूडेंट्स को बेहतर सिटी ट्रांसपोर्ट, वाईफाई जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। कोचिंग सेफ्टी सेल बने। बच्चों के लिए हर वार्ड में गेमिंग जोन होने चाहिए।
प्रियांशु चौहान
वुमन सेफ्टी बेहद जरूरी है। खास तौर पर बाहर से आकर पढ़ रहे बच्चों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। हर वार्ड में सीसीटीवी होने चाहिए। निगम में ई-सिस्टम लागू होना चाहिए।
हर्षलीन सोहल
कोटा स्मार्ट सिटी में शामिल है तो निगम के कामकाज में भी स्मार्टनेस नजर आनी चाहिए। मोबाइल ऐप पर निगम की हर सेवा उपलब्ध होनी चाहिए। ताकि निगम के चक्कर नहीं लगाने पड़े।
श्लोक अवस्थी
दोनों ही राजनीतिक दलों को नगर निगम के लिए 60 फीसदी यूथ को चुनाव लड़वाना चाहिए। उच्च शिक्षित पार्षद निगम में जीतकर आएंगे तो बेहतर कामकाज होगा।
हिमा
शहर में सफाई सिस्टम को सुधारने की जरूरत है। टिपर कब आते हैं, पता नहीं चलता है। निगम को ऐप सेवा शुरू करनी चाहिए, ताकि घर बैठे निगम में शिकायत कर सके।
मीना सैन
शहर को गार्बेज फ्री बनाने की दिशा में काम होना चाहिए। शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे रहते हैं। गंदगी के कारण शहर की छवि पर खराब होती है। शहर को डस्टबिन फ्री बनाया जाना चाहिए।
दीपल सोनी
कोटा कोचिंग सिटी है, ऐसे में शहर के सभी 100 वार्ड में ई-लाईब्रेरी खोली जानी चाहिए। जहां पार्क नहीं है वहां पार्क बने, ओपन जिम बने, कल्चर सेन्टर भी बनने चाहिए।
दीनल वर्मा
छोटी-मोटी परेशानियां चलती रहती है, लेकिन जिस तरह से कोटा शिक्षा नगरी है,उसे देखते हुए हर वार्ड में लाइब्रेरीज स्थापित हो।
कशीश नागर
यूथ के लिए कोई ऐसा सेंटर स्थापित हो जहां रोजगार, व्यवसाय के प्रति सहज मार्गदर्शन मिल सके।शहर के विकास के साथ ड्रेनेज सिस्टम को भी बेहतर करने की जरूरत है।
दिलीप गंगवाल