गुरुद्वारा साहिब दादाबाड़ी में सोमवार को गुरु अर्जुन देव का शहीदी पर्व अकीदत से मनाया गया। उनके त्याग को याद करते हुए दादाबाड़ी स्थित गुरु अर्जुद देव पार्क में दीवान सजाया गया।
सैकड़ों की संख्या में लोगों ने गुरुग्रन्थ साहिब के समक्ष मत्था टेका। शबद-कीर्तन का आनंद लिया। स्थानीय व अन्य जगहों से आए हजूरी रागी जत्थों ने शबद-कीर्तन कर पांडाल में आध्यात्म की ज्योत जलाई।
साथ ही, उनके बताए मार्ग पर चलने की सीख दी। इस दौरान वाहे गुरुजी का खालसा, वाहे गुरुजी की फतह सरीखे उद्घोषों से पांडाल गूंजता रहा।
अमृतसर के जसवीर सिंह जमालपुरी, गुरुद्वारे के रागी मोहन सिंह व गुरुद्वारा साहिब विज्ञान नगर के हजूरी रागी जसविंदर सिंह के जत्थों ने 'ततु विचार यहै मथुरा जग तारन कउ अवतार बनायउ। जपउ जिन अरजन देव गुरु फिरि संकट जोनि गरभ न आयउ...., हर तन मन वसिया सोई, जय जयकार करे सभ कोई..., जो नगर दुख में दुख नहीं माने... व ब्रह्मज्ञानी सत जीवे नहीं मरता, मन सांचा, मुख सांचा सोवै, ब्रह्मज्ञानी सब सृष्टि का करता... सरीखे शबद सुनाए।
गुरुद्वारा अगमगढ़ साहिब के जत्थेदार बाबा लक्खा सिंह, कोटा सिख प्रतिनिधि सभा सोसायटी के तरुमीतसिंह बेदी, विधायक संदीप शर्मा व अन्य कई गणमान्य कार्यक्रम में शामिल हुए। गुरुद्वारा सचिव हरमीत सिंह, प्रधान मंगल सिंह व अन्य पदाधिकारियों ने सिरोपा भेंट कर स्वागत किया। संचालन जितेन्द्र मोहन सिंह ने किया।
इतिहास से बच्चों को रू-ब-रूकरवाना जरूरी
मंजी साहिब अमृतसर से आए कथावाचक ज्ञानी बलदेव सिंह ने कहा कि बच्चों को संत महापुरुषों के जीवन से अवगत कराना आवश्यक है, ताकि उन्हें प्रेरणा मिल सके।
उन्होंने कहा कि गुरु अर्जुन देव समाज में समानता चाहते थे, मानव अधिकारों की रक्षा करना चाहते थे। उन्होंने मानवाधिकारों व दुख मिटाने के लिए बलिदान दिया। उनकी शहादत हमारे लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।
बरता गुरु का लंगर
इस मौके पर गुरु का अटूट लंगर बरता। इसे सैकड़ों लोगों ने छका। समाज के लोगों ने लंगर छकाने में सहयोग किया। व्यवस्थाओं को अंजाम देने में युवा व बुजुर्ग लगे हुए थे।