
पहले 20 प्रतिशत का था प्रावधान, थैलेसीमिया बच्चों, प्रसूताओं व दुर्घटना पीडि़तों को मिलेगी राहत
बारां। सरकारी ब्लड सेंटरों में रक्त की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने रक्तदान शिविरों को लेकर नई व्यवस्था लागू की है। अब राज्य में होने वाले रक्तदान शिविरों में कुल रक्त संग्रहण का 50 प्रतिशत हिस्सा सरकारी ब्लड सेंटर में जमा कराना अनिवार्य होगा। पहले यह प्रावधान 20 प्रतिशत रक्त उपलब्ध कराने का था। नई व्यवस्था के तहत सरकारी ब्लड सेंटर से 200 किमी से अधिक दूरी पर होने वाले शिविरों में एकल रक्त बैग में रक्त संग्रहण की अनुमति दी जाएगी।
सख्त करने होंगे प्रावधान
सूत्रों का कहना है कि सरकार की ओर से मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए नई व्यवस्था की गई है, लेकिन इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए नियमों को भी सख्त करने की जरूरत है। कई आयोजक संस्थाएं केवल निजी ब्लड सेंटर की टीम को शिविर में बुलाती हैं और संग्रहित रक्त निजी सेंटर में ही जमा हो जाता है। इससे सरकारी ब्लड सेंटर में अधिक जरूरत वाले कुछ रक्त समूहों की कमी हो जाती है। जरूरतमंद मरीजों के लिए समय पर रक्त की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। शिविरों में सरकारी ब्लड सेंटर की टीम को भी रक्त संग्रहण के लिए शामिल किया जाना चाहिए। आयोजकों और निजी रक्त संग्रहण टीमों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान भी प्रभावी ढंग से लागू होना चाहिए।
सरकारी रक्त भंडार मजबूत करने की पहल
राजस्थान राज्य रक्त संचरण परिषद ने 23 जुलाई को गर्भवती महिलाओं और रक्तस्राव से पीडि़त प्रसूताओं को बिना रिप्लेसमेंट रक्त उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकारी ब्लड सेंटरों में रक्त की मांग बढऩे की संभावना को देखते हुए 29 जुलाई को नई व्यवस्था लागू की गई। इससे सरकारी रक्त भंडार मजबूत होगा तथा थैलेसीमिया पीडि़त बच्चों, प्रसूताओं, दुर्घटना में घायल और अन्य जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सकेगा।
जिला अस्पताल के ब्लड सेंटर प्रभारी डॉ. बिहारी लाल मीणा ने बताया कि आयोजक संस्थाओं और आमजन से सरकारी ब्लड सेंटर में ही रक्तदान शिविर आयोजित कराने की अपील की जा रही है।
-मृत्यु में कमी लाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। शिविर आयोजकों को सरकारी ब्लड सेंटर को 50 प्रतिशत रक्त उपलब्ध कराना होगा। आदेशों की पालना नहीं करने पर दोबारा अनुमति नहीं दी जाएगी। कार्रवाई के लिए सरकार को अवगत कराया जाएगा।
-उमेश मखीजा, सहायक औषधि नियंत्रक, बारां-झालावाड़