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टैरिफ वार का राजस्थान में असर, खतरे में आया अमरीका जाने वाला 400 करोड़ का निर्यात

कोटा स्टोन, जो पूरी दुनिया में अपने टिकाऊपन और सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है, अमरीका में भी सालाना करीब 100 करोड़ का निर्यात होता है।

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Aug 01, 2025
निर्यात के लिए कोटा स्टोन की पैकिंग की जा रही है, लेकिन यह फैक्टरियों में ही रखा हुआ है (फोटो: पत्रिका)

अमरीका की ओर से भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाने की घोषणा के बाद कोटा संभाग के निर्यातकों, व्यापारियों और उत्पादकों की चिंता बढ़ गई है। इससे यहां के कई उत्पादों की अमरीकी बाजार में मांग घट सकती है। जिससे निर्यात घटेगा और स्थानीय उद्योगों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। हाड़ौती अंचल से कोटा स्टोन, सेण्ड स्टोन, कृषि, डी-ऑयल्ड केक (डीओसी) और डेयरी उत्पाद व केमिकल आदि अमरीका निर्यात होता है। निर्यातक ट्रप के टैरिफ वार से परेशान है और फिलहाल निर्यात से पीछे हट रहे हैं। इसका आगामी दिनों में असर दिखेगा। उद्यमी केन्द्र सरकार से टैरिफ बढ़ाने के मुद्दे पर अमरीका से बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने की मांग उठा रहे हैं।

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200 करोड़ के पत्थर का निर्यात अटकेगा

कोटा स्टोन, जो पूरी दुनिया में अपने टिकाऊपन और सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है, अमरीका में भी सालाना करीब 100 करोड़ का निर्यात होता है। स्टोन इम्पोर्ट पर टैरिफ बढ़ाने से इन उत्पादों की लागत वहां बढ़ जाएगी। जिससे खरीदार दूसरे देशों की ओर रुख कर सकते हैं। इससे कोटा स्टोन इंडस्ट्री को नुकसान हो सकता है। सेण्ड स्टोन का भी इतने ही करोड़ का निर्यात होता है, जो भी प्रभावित होगा।

धनिया और मसाले पर भी असर

कोटा संभाग खासकर कोटा, बारां और झालावाड़ जिले देश में सबसे ज्यादा धनिया उत्पादन करने वाले क्षेत्र हैं। यहां का धनिया अमरीका समेत कई देशों को निर्यात होता है। लेकिन नए टैरिफ के चलते अमरीकी व्यापारी अन्य देशों से मसाले खरीदने की सोच सकते हैं। सोया प्लांटों से सालाना करीब 50 करोड़ की डीओसी निर्यात होती है, इस पर भी असर पड़ेगा। हाड़ौती अंचल से सालाना 100 करोड़ के कृषि उत्पाद निर्यात किए जाते हैं।

क्या बोले उद्यमी…

अमरीका की टैरिफ बढ़ोतरी कोटा संभाग की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा। खासकर उन क्षेत्रों को जो वैश्विक बाजारों पर निर्भर हैं। यदि जल्द ही समाधान नहीं निकाला गया, तो इससे न केवल निर्यात घटेगा बल्कि स्थानीय रोजगार भी प्रभावित होगा।

गोविंद राम मित्तल, संस्थापक अध्यक्ष, एसएसआइ एसोसिएशन

इससे हाड़ौती में कृषि व खाद्य उत्पादों के निर्यात पर असर पड़ने वाला है। मुख्य तौर पर यहां के सोया प्लांटों से डीओसी निर्यात होती है। टैक्स बढ़ाने से हमारे उत्पाद महंगे हो जाएंगे और अमरीका सस्ते उत्पादों के लिए अन्य देशों की ओर रुख कर सकता है।

अविनाश राठी, अध्यक्ष कोटा ग्रेन एण्ड सीड्स मर्चेंट्सएसोसिएशन

निर्यात के लिए की गई कृषि उत्पादों की पैकिंग (फोटो: पत्रिका)

मध्यप्रदेश, गुजरात के बाद राजस्थान में ही धनिये का सर्वाधिक उत्पादन होता है। कोटा और प्रदेश से मसाले निर्यात होते हैं, टैरिफ बढ़ाने से निर्यात पर विपरीत असर पड़ेगा।

महावीर गुप्ता, प्रदेश सचिव, राजस्थानी स्पाइस ऑफ एसोसिएशन

निर्यातक डरे हुए हैं। पहले भी अचानक टैरिफ बढ़ाने का ऐलान कर दिया था। बाद में अमरीका को झुकना पड़ा था। टैरिफ बढ़ाने से भाड़ा महंगा हो जाएगा, इससे स्टोन का निर्यात सीधे तौर पर प्रभावित होगा।

रोहित सूद अध्यक्ष, हाड़ौती कोटा इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन

इन उत्पादों पर भी असर पड़ेगा

हाड़ौती में आधा दर्जन केमिकल उद्योग संचालित है। अमरीका से केमिकल व उसके उत्पाद निर्यात किए जाते हैं, टैरिफ बढ़ाने से असर पड़ेगा। कोटा डोरिया साड़ी और अन्य हैंडलूम उत्पाद भी सीमित मात्रा में निर्यात होते हैं। टैरिफ बढ़ने से इन साड़ियों और फैब्रिक की कीमत अमरीका में ज्यादा हो जाएगी, जिससे ऑर्डर घट सकते हैं।

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Published on:
01 Aug 2025 01:55 pm
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