
कोटा . एमबीएस अस्पताल की बर्न यूनिट में पिछले पांच दिन से ना तो किसी ने कचरा उठाया, ना झाडू-पौंछा किया। वार्ड के बाहर गैलरी में सफाई नहीं होने से फर्श पर गंदगी की काली परत चढ़ने लगी है। इस यूनिट में झुलसे हुए रोगियों का उपचार किया जाता है। उपचार में स्वस्थ होने की पहली शर्त ही यही है कि रोगी को संक्रमण से बचाया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। संविदा कर्मचारी हड़ताल पर हैं और रोगी गंदगी के बीच उपचार कराने को बाध्य। हर वक्त संक्रमण का खतरा उनके मर्ज को जानलेवा बनाने को आतुर दिख रहा है।
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वार्ड में भर्ती रोगी के परिजन हुकमाराम ने बताया कि वे 19 जून से बर्न यूनिट में हैं। तब से ना तो कभी कोई कचरा उठाने यहां आया और ना किसी ने झाडू अथवा पौंछा लगाया। वार्ड के हालात भी हुकमाराम की बात की गवाही देते दिख रहे हैं। पूरा अस्पताल कचरे के ढ़ेर में तब्दील हो गया है। अस्पताल में प्रवेश के साथ ही गंदगी और कचरा नजर आने लगता है। जगह-जगह कबूतर की बीट, खाने-पीने की चीजों का कचरा, कहीं पट्टी, कहीं डिस्पोजेबल और ना जाने दूसरी गंदगी से अस्पताल अटा है। चिंताजनक यह कि बायोमेडिकल वेस्ट भी वार्डों में खुले में पड़ा है। कोई देखने वाला तक नहीं।
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सर्जीकल वार्ड
सर्जीकल ए वार्ड में नर्सिंग स्टेशन के पास ही ड्रेसिंग करने वाली ट्रॉली रखी हुई मिली। इस ट्रॉली के नीचे की ओर रखी बाल्टी में कचरा भरा था। इसमें संक्रमण फैलाने वाले मवाद, रक्त से सनी पट्टियां, कैथेटर और अन्य ऐसे ही खतरनाक संक्रमण के कारक वेस्ट जमा थे। सर्जीकल बी वार्ड की तो गैलेरी में ही जगह-जगह बायोमेडिकल वेस्ट पड़ा दिखा। वहीं रोगियों के परिजन सुस्ता रहे हैं, खाना खा रहे हैं। चिकित्सा विज्ञान से अनजान इन रोगियों को कोई यह बताने वाला भी नहीं कि यहां बैठना या भोजन करना खतरनाक है।
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मेडिकल वार्ड
मेडिकल सी वार्ड में पीछे की गैलरी में रोगी भर्ती हैं। यहीं कचरे का ढेर भी लगा है। पूरे वार्ड का यही हाल। मेडिकल बी वार्ड के बाहर लगे वाटरकूलर की हालात भी ऐसे ही हैं। यहां भी गंदगी का ढेर लगा है। इसके बाहर रोगी परिजनों के बैठने के लिए स्थान बनाया है, लेकिन वहां भी नालियां जाम हैं, गंदगी बाहर आ रही है।
साहब के गलियारे चकाचक
अस्पताल के मुख्य द्वार पर अंदर की ओर बने सर्जीकल स्टोर से लेकर अस्पताल अधीक्षक और प्राचार्य के कक्ष तक का रास्ता साफ सुथरा दिखा। इसकी रोजाना सफाई हो रही है।
संवेदक के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उसे आदेश दिए हैं कि कर्मचारी उपलब्ध कराए। कर्मचारियों से भी बात की जा रही है।
-नवीन सक्सेना, अधीक्षक एमबीएस चिकित्सालय