
कोटा. देश के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षाओं जेईई मेंस और जेईई एडवांस्ड का एक रिकॉर्ड इस बार भी टूटने से रह गया। जेईई मेंस का कोई भी टॉपर अब तक जेईई एडवांस्ड टॉप नहीं कर पाया। हालांकि इस बार मेंस के टॉपर्स ने पिछले साल की अपेक्षा काफी बेहतर प्रदर्शन किया।
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जेईई मेंस 2017 में 360 में से 360 अंक हासिल कर अखिल भारतीय स्तर पर टॉप करने वाले उदयपुर के छात्र कल्पित वीरवाल ने सर्वधिक अंक हासिल करने का इतिहास रचा था, लेकिन जब जेईई एडवांस्ड का रिजल्ट आया तो वह टॉप 100 में भी जगह नहीं बना सके।
एडवांस्ड में उनकी रैंक 109वीं रही थी। इस बार भी मेंस का टॉपर एडवांस्ड टॉप नहीं कर सका। हालांकि इस बार पिछले साल के मुकाबले मेंस के रैंकर्स ने एडवांस्ड में शानदार प्रदर्शन किया। इस साल मेंस के टॉपर रहे आंध्रप्रदेश के छात्र भोगी सूरज कृष्णा एडवांस्ड में 49वीं रैक लाने में सफल रहे।
इस साल ये रही रैंक
जेईई मेंस 2018 में चौथी रैंक लाने वाले पंचकुला के प्रणव गोयल जेईई एडवांस्ड 2018 के टॉपर बने, जबकि मेंस में दूसरी रैंक लाने वाले हेमंत कुमार ने एडवांस्ड में 7वीं रैंक हासिल की।
वहीं मेंस में छठी रैंक लाने वाले पवन गोयल ने एडवांस्ड में चौथी, मेंस में 13वीं रैंक लाने वाले लय जैन ने एडवांस्ड में 9वीं, मेंस में 24वीं रैंक लाने वाले साहिल जैन ने एडवांस्ड में दूसरी, मेंस में 182वीं रैंक लाने वाले नील आर्यन गुप्ता ने 10वीं रैंक हासिल की। एडवांस्ड में गल्र्स टॉपर और अखिल भारतीय स्तर पर छठी रैंक लाने वाली मीनल पारख की मेंस में 387वीं रैंक थी। वहीं एसटी कैटेगरी जेएस तरुण ने मेंस में 14वीं रैंक हासिल की थी।
सफलता नहीं दोहरा पाने की वजह
मेंस और एडवांस्ड दोनों के पैटर्न में काफी अंतर है। दोनों परीक्षाओं में सवालों का स्वरूप बदल जाता है। एडवांस्ड विश्लेषणात्मक है और मेंस के मुकाबले थोड़ा कठिन है। इसलिए दोनों को क्वालिफाई करने के दौरान रैंक में अंतर आ जाता है।
दोनों परीक्षाओं का मार्किंग पेटर्न अलग है। जहां जेईई मेंस में चार विकल्प और सिंगल करेक्ट होता है। वहीं जेईई-एडवांस में मल्टी करेक्ट ऑप्शन, इंटीरियर, मैचिंग आदि भी आते हैं। सवालों में ट्रैपिंग रहती है, ऐसे में अच्छे से अच्छे बच्चे भी धोखा खा जाते हैं।
एनआईटी में लड़कियों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए कुल 14 परसेंट सीटों पर रिजर्वेशन रखा गया।
लड़कियों के लिए 14 फीसदी सीटों पर रिजर्वेशन
रिजर्वेशन के तहत आईआईटी और एनआईटीज की हर ब्रांच में हर कैटेगरी की 14 परसेंट सीट गल्र्स के लिए होंगी। यानी मैकेनिकल, कम्प्यूटर साइंस, सिविल आदि सभी अलग-अलग ब्रांचेज में ओबीसी, एसटी और एससी की छात्राओं को अलग-अलग 14 परसेंट रिजर्वेशन मिलेगा।
पिछले साल तक देशभर की 23 आईआईटी में सिर्फ 8 परसेंट और 31 एनआईटीज में 18 परसेंट छात्राएं ही दाखिला ले पाई थीं, जबकि विदेशी तकनीकी संस्थानों में दाखिले का यह प्रतिशत करीब 49 फीसदी रहता है।