
कोटा. बूंदी से चला जुगराज सीमा लांघकर कैसे करांची तक पहुंचा इसका खुलासा अब शायद ही हो सकेगा। बात 6 साल पुरानी है। जुगराज ट्रक के पीछे लटककर बूंदी से बॉर्डर इलाके में चला आया। जहां ट्रक से नीचे उतर कर भटकता हुआ बॉर्डर पा कर गया। उसे पता नहीं चला कि उसके कदम पाकिस्तान में कब पड़ गए। पाकिस्तानी रेल में सवार हिंदुस्तानी मुसाफिर जुगराज अप्रेल 2014 में कराची पुलिस के हत्थे चढ़ा।
17 अप्रेल 2014 को फॉर्नर एक्ट 14 के अंडर सेक्शन 3 के तहत अवैध घुसपैठ के आरोप साबित हुए तो कराची कोर्ट ने उसे 15 दिन के लिए जेल भेज दिया, लेकिन करांची की लांधी जेल की बैरकों में पाकिस्तानी सिपाहियों की बर्बरता उस पर ऐसी तारी हुई कि अपना नाम और पता तक भूल बैठा। गिरफ्तारी और सजा मुकम्मल होने के बावजूद पाकिस्तानी पुलिस ने भारतीय दूतावास को उसकी भनक तक नहीं लगने दी। आठ महीने तक खौफनाक यातनाओं का ऐसा दौर चला कि सुधबुध तक गंवा बैठा।
बदल दी शिनाख्त
बर्बरता का शिकार हो जब जुगराज पूरी तरह से संवेदनाहीन हो गया तब जाकर कराची पुलिस ने भारतीय दूतावास को उसकी पाकिस्तान में मौजूदगी की खबर दी। 16 जनवरी 2015 को पहली बार उसे काउंसलर मुहैया कराया गया। काउंसलर की कोशिशों के बाद 30 जून 2015 को भारतीय विदेश मंत्रालय को सौंपी गई पाकिस्तानी जेलों में कैद भारतीयों की सूची में पहली बार उसका जिक्र हुआ, लेकिन जुगराज नहीं, बल्कि बबली भाई के नाम से। पिता का नाम भैंरूलाल भील की बजाय योगराज और गांव का नाम रामपुरिया की बजाय रामपुर रख दिया गया।
इसी पहचान को तलाशती जुगराज की फाइल तीन साल तक दिल्ली से जयपुर और जयपुर से बूंदी तक के तमाम चक्कर काटती रही। पिछले साल मई के महीने में एक बार फिर बबली भाई को तलाशती यह फाइल तालेड़ा थाने तक जा पहुंची। गनीमत यह रही कि वहां तैनात सीआई बुद्धिप्रकाश ने गांव के नाम की गलती को पकड़़ लिया और रामपुर नाम के गांव की तलाश करने के बजाय डाबी थाने के रामपुरिया में तफ्तीश शुरू कर दी।
पाकिस्तान तक पहुंची पत्रिका की खबर
फाइल में इस बार बबली भाई की फोटो भी मौजूद थी, जिसे देखकर पक्का हो सका कि वही जुगराज है। 28 जुलाई 2018 को राजस्थान पत्रिका ने जब 'पाकिस्तान ने बदल डाली बूंदी के जुगराज की पहचान खबर प्रकाशित की तो भारतीय नागरिकों की रिहाई में जुटी विदेश मंत्रालय की तत्कालीन अंडर सेक्रेटरी सौम्या सी तक यह मामला पहुंचा। राजस्थान पत्रिका से उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत जानकारी जुटाई और उसके बाद पूरी दमदारी से पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय को गलती सुधारने के लिए प्रकाशित समाचार और नागरिकता के सबूत उन्हें सौंपे। इसके बाद ही पाकिस्तान ने बबली भाई के नाम के सामने पहली बार उर्फ जुगराज दर्ज किया और उसकी रिहाई संभव हो सकी।