कई हादसे हो चुके, काम नहीं आने से नहीं हो पा रही सारसंभाल
जलवाड़ा (बारां). क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांवों में बिना मुंडेर कुएं खतरे के सबब बने हुए हैं। कस्बे में जामुनिया कुआं, खारिया कुआं, सिताला चौक का कुआं, केलियां कुआं, मोती महाराज का कुआं, पटेलों के बाग का कुआं, विद्यालय परिसर के निकट का कुआं, बस स्टैंड के निकट का कुआं सभी बिना मुंडेर के हैं। इनमें से कई क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इनमें कई कुओं में हादसे भी हो चुके हंै। लोगों ने समय के साथ कुओं की अनुपयोगिता समझते हुए मावर मोहल्ला स्थित कुआ व गढ़ परिसर स्थित कुएं को जमींदोज कर दिया है। कस्बे के बराना मार्ग, किशनगंज मार्ग व नाहरगढ़ मार्ग पर भी किसानों ने खेतों में दर्जनों कुएं खुदवा रखे हैं। अब किसानों ने नल कूप खुदवा लिए है। इसलिए अब जरूरत नहीं रहने से इन कुओं की सारसंभाल भी नही की जा रही है। ऐसे में दर्जनों कुएं जीर्ण-शीर्ण हो गए हंै। कई बार इनमे से कई कुओं में रात के समय जंगली जानवर व मवेशी गिर चुके हैं। क्षेत्र के पीपलोद, रामपुरा, ख्यावदा, बजरंगगढ़, अहमदा, हरिपुरा, मोतीपुरा, चरडाना, खल्दा, रामबिलास, बहादुरगंज सहित अन्य गांवों व खेतों में दर्जनों कुएं बिना मुंडेर के हंै।
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इसलिए नहीं रही इनकी जरूरत
दो दशक पूर्व तक कुएं लोगो की जीवनशैली का महत्व पूर्ण हिस्सा थे। इन कुओं से पीने का पानी लाते थे। किसान दिन भर चरस या डीजल पंप चला कर खेती करते थे। अब गांवों में जगह-जगह मोहल्लों में नलकूप लग गए तो कई गांवो में जलदाय विभाग ने टंकियां बना कर घर,घर पानी पहुंच दिया है। इसी प्रकार कुएं 60 से 70 फीट या इससे अधिक गहरे हुआ करते थे। अब 300 से लेकर 700 फीट गहराई तक नल कूप खुदवाते हंै। इसलिए अब कुएं रीते ही रह जाते हैं। इस कारण ये अनुपयोगी साबित हो रहे हंै।