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कोटा के लोगों का कारनामा: दिन-रात एसी चलाए फिर भी बिजली बचाने में राजस्थान में दूसरे नंबर पर, कैसे, पढि़ए खबर

राजधानी जयपुर की बात अगर छोड़ दी जाए तो कोटा के लोग बिजली बचाने में पूरे प्रदेश में सबसे आगे हैं।
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May 21, 2019
electricity saving
कोटा के लोगों का कारनामा: दिन-रात एसी चलाए फिर भी बिजली बचाने में राजस्थान में दूसरे नंबर पर, कैसे, पढि़ए खबर

कोटा. राजधानी जयपुर की बात अगर छोड़ दी जाए तो कोटा के लोग बिजली बचाने में पूरे प्रदेश में सबसे आगे हैं। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ज्वॉइंट वेंचर एनर्जी एफिशिएंसी सर्विस लिमिटेड (ईईएसएल) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। बिजली की खपत कम करने के लिए कोटा के लोग न सिर्फ एलईडी लाइट्स, बल्कि एलईडी ट्यूबलाइट और पंखों का भी खूब इस्तेमाल कर रहे हैं।

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बिजली की खपत और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने जनवरी 2019 में उजाला (उन्नत ज्योति बाई अफोर्डेबल एलईडी बल्ब फॉर ऑल) योजना की शुरुआत की थी। उस वक्त बाजार में एक एलईडी बल्ब की कीमत करीब 310 रुपए थी, लेकिन डोमेस्टिक एफीशियंट लाइटिंग प्रोग्राम के तहत ऊर्जा क्षेत्र में काम कर रही सरकारी एजेंसियों ने आम उपभोक्ताओं को सिर्फ 73 रुपए में इन्हें बेचा। साथ ही, बल्ब खराब होने पर तीन साल की गारंटी दी तो कोटा में लोगों ने 10,40,550 एलईडी खरीद घर के सारे पुराने बल्ब इससे बदल डाले। इसके बाद आई एलईडी ट्यूब लाइट और लो एफीशिएंट पंखों को भी कोटावासियों ने हाथों हाथ लिया। योजना शुरू होने के बाद से कोटा में 31,756 ट्यूब लाइट और 10,432 पंखे खरीदे जा चुके हैं। बड़ी बात यह है कि इनके खराबी या रिप्लेसमेंट की दर 0.50 फीसदी से भी कम रही।

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राजस्थान में सबसे आगे
बिजली बचाने की मुहिम में पूरे राजस्थान में राजधानी जयपुर सबसे आगे है। उसके बाद जोधपुर, उदयपुर, जैसलमेर और बीकानेर ही नहीं अलवर जैसे बड़े शहरों को पीछे छोड़ कोटा उनसे कई कदम आगे निकल चुका है। यह स्थिति तब है जब 1800 से लेकर 2000 रुपए में बाजार में बिकने वाले 5 स्टार रेटिंग के एफीशिएंट फैन को सरकारी कंपनियां महज 950 रुपए और 700 रुपए से ज्यादा की कीमत पर बाजार में मिलने वाली एलईडी ट्यूब लाइट महज 230 रुपए में मुहैया कराई गईं।

ये हैं फिसड्डी
बिजली बचाने के मामले में पूरे प्रदेश में धौलपुर, करौली, प्रतापगढ़, जालौर और बांसवाड़ा सबसे फिसड्डी साबित हुए। एलईडी की बात करें तो पिछले चार साल में सबसे कम जालौर में लोगों ने महज 87,961 बल्ब ही खरीदे, जबकि सबसे कम 150 ट्यूबलाइट करौली, 520 धौलपुर, 977 दौसा और 991 झुंझनंू के लोगों ने खरीदी। ऐसे ही एफीशिएंट फैन के मामले में भी धौलपुर में 178, करौली में 237, प्रतापगढ़ में 392 और बांसवाड़ा में सिर्फ 460 पंखे ही लोगों ने खरीदे।

बचाई 1854 करोड़ की बिजली
ईईएसएल की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक एलईडी बल्ब, ट्यूब लाइट और एफीशिएंट फैन की वजह से पूरे प्रदेश में इस साल 1854.87 करोड़ रुपए की 2.53 करोड़ मेगावाट बिजली बचाई है। इतना ही नहीं इलेक्ट्रिसिटी की पीक डिमांड में 433 मेगावाट में कमी आने के साथ ही पूरे साल में 17.34 लाख टन कार्बनडाई ऑक्साइड के उत्सर्जन में भी कमी आई है।

यह रही वजह
जेवीवीएनएल के संभागीय मुख्य अभियंता क्षेमराज मीणा के मुताबिक एलईडी लाइट्स और फैन के बढ़ते इस्तेमाल की प्रमुख वजह लोगों की जागरूकता और बिजली चोरी की स्थिति है। कोटा के लोग पर्यावरण और ऊर्जा की बचत को लेकर खासे जागरूक हैं। इसके साथ ही यहां शहर से लेकर गांव तक बिजली की चोरी न के बराबर है। इसलिए बिजली की खपत को कम करने के लिए वह जयपुर के बाद प्रदेश में सबसे ज्यादा कम बिजली की खपत करने वाली एलईडी बल्व, ट्यूबलाइट और एफीशिएंट पंखों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

Published on:
21 May 2019 11:26 am