
कोटा. सहकारिता विभाग ने कोटा डेयरी प्रबंधन की चेहती फर्म चित्रांशु पूर्व सैनिक बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति पर शिकंजा कस लिया है। अनियमितताओं के चलते समिति को (अवसायन) समाप्त करने की तैयारी कर ली है। उधर पशुपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया तक डेयरी के प्रबंध निदेशक और लेखाधिकारी के घोटाले की जांच रिपोर्ट पहुंचने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं। दोनों अधिकारी कार्रवाई से बचने के लिए जुगाड़ में लगे हुए हैं।
राजस्थान पत्रिका ने डेयरी में श्रम विभाग का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर लेबर सप्लाई का अनुचित तरीके से ठेका लेने तथा डेयरी के दोनों अधिकारियों द्वारा समिति का बचाव करने का मामला प्रमुखता से प्रकाशित किया था। फर्म और दोनों अधिकारियों को सहकारिता विभाग तथा एसीबी जांच में भी दोषी माना गया था। यह मामला मंत्री तक पहुंच गया।
उधर सहकारी समितियां कोटा के उप रजिस्ट्रार ने चित्रांशु सहकारी समिति के व्यवस्थापक को नोटिस जारी कर दिया है। इसमें कहा कि आपकी समिति की कई सालों से आमसभा नहीं हुई है, जबकि सहकारी अधिनियम में हर साल आमसभा करवाना अनिवार्य होता है, न निर्वाचन करवाकर विभाग को सूचित किया है। समिति का कई सालों से ऑडिट भी नहीं हुआ है।
समिति के क्रिया-कलापों की सूचना भी विभाग को नहीं दी। कार्यालय रिकॉर्ड के अनुसार चित्रांशु सहकारी समिति कई सालों से निष्क्रिय है। सहकारी अधिनियमों के अनुरूप समिति काम नहीं कर रही है। अत: समिति को अवसायन में लाया जाना आवश्यक हो गया है।
उप रजिस्ट्रार के समक्ष 2 जुलाई को सुबह 11 बजे पेश होकर लिखित व मौखिक जवाब पेश करने का समय दिया गया है। इसके बाद समिति को राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001 की धारा 61के तहत अवसायन में लाए जाने की अग्रिम कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।