कोटा न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दो प्रसूताओं की मौत और कई महिलाओं की किडनी फेल होने के मामले में कांग्रेस ने बड़ा कदम उठाते हुए 'स्पेशल 4' कमेटी का गठन किया है।
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद दो महिलाओं की मौत और आधा दर्जन महिलाओं की किडनी फेल होने की दहला देने वाली घटना ने समूचे प्रदेश को झकझोर दिया है। जहाँ एक तरफ सरकार जांच की बात कह रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे 'सरकारी हत्या' करार देते हुए अपनी 'स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम' मैदान में उतार दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है, जो अब इस दुखद घटनाक्रम की अपने स्तर पर अलग से पड़ताल करेगी।
कांग्रेस ने इस जांच के लिए ऐसे चेहरों को चुना है जो प्रशासनिक और चिकित्सा क्षेत्र की गहरी समझ रखते हैं।
परसादी लाल मीणा: पूर्व स्वास्थ्य मंत्री, जिन्हें राजस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं की बारीकियों और कमियों का लंबा अनुभव है।
डूंगर राम गैदर: वरिष्ठ विधायक, जो सरकार को सदन से लेकर सड़क तक घेरने में माहिर हैं।
पुष्पेंद्र भारद्वाज: प्रभारी महासचिव (कोटा जिला), जो स्थानीय स्तर पर साक्ष्यों को जुटाने का काम करेंगे।
विकास महला: प्रदेश अध्यक्ष (चिकित्सा प्रकोष्ठ), जो तकनीकी और मेडिकल पहलुओं की जांच करेंगे कि आखिर 'इंफेक्शन' फैला कैसे?
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यह कमेटी केवल औपचारिकता नहीं करेगी।
कोटा न्यू मेडिकल कॉलेज में सीजेरियन सेक्शन (C-Section) के बाद एक के बाद एक कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने लगी।
कांग्रेस का यह कदम भाजपा सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
जवाबदेही का सवाल: परसादी लाल मीणा ने सवाल उठाया है कि जब राज्य में 'जीरो टॉलरेंस' की बात होती है, तो अस्पताल 'बूचड़खाना' क्यों बनते जा रहे हैं?
मेडिकल नेग्लिजेंस: क्या अस्पताल प्रशासन ने मौतों के आंकड़े छुपाने की कोशिश की? क्या विधायक के दौरे के दौरान डॉक्टर की हंसी इस पूरे मामले को रफा-दफा करने का संकेत थी?