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कोटा: महंत देवानंद महाराज हत्याकांड का पुलिस ने किया खुलासा, सुपारी देकर करवाई गई थी हत्या

Kota Mahant Devanand Murder Case : चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद हत्याकांड में कोटा शहर पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए मुख्य साजिशकर्ता सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सिटी एसपी तेजस्वनी गौतम ने गुरुवार को बताया कि मठ की संपत्ति, ट्रस्ट के नियंत्रण और बढ़ते प्रभाव को लेकर चल रहे विवाद के चलते हत्या की साजिश रची गई थी।

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Jun 11, 2026
Kota Mahant Devanand Murder Case
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी। फोटो पत्रिका

Kota Mahant Devanand Murder Case : कोटा। चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद हत्याकांड में कोटा शहर पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए मुख्य साजिशकर्ता सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सिटी एसपी तेजस्वनी गौतम ने गुरुवार को बताया कि मठ की संपत्ति, ट्रस्ट के नियंत्रण और बढ़ते प्रभाव को लेकर चल रहे विवाद के चलते हत्या की साजिश रची गई थी। मामले में विरोधी गुट के कथित अध्यक्ष और अधिवक्ता संतोष कुमार राय तथा वारदात में शामिल पुष्पेंद्र सिंह उर्फ प्रिंस को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, आदित्य वर्मा, अंकित बैरवा और अन्य साथियों की तलाश जारी है।

एसपी गौतम ने बताया कि 5 जून की रात बोरखेड़ा थाना क्षेत्र स्थित चंद्रेसल मठ में महंत देवानंद की चाकुओं से हमला कर हत्या कर दी गई थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुभाषचंद मिश्रा के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई। साइबर सेल, डीएसटी और विभिन्न थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने मामले की जांच शुरू की।

पुलिस जांच में सामने आया कि करीब 1100 वर्ष पुराने चंद्रेसल मठ की 750 बीघा भूमि और करोड़ों रुपए की संपत्ति को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। महंत देवानंद नई कार्यकारिणी को कानूनी मान्यता दिलाने के प्रयास कर रहे थे, जबकि पुराने गुट की ओर से इसका विरोध किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार संतोष राय स्वयं ट्रस्ट के संचालन में प्रभाव चाहता था और महंत देवानंद की बढ़ती सक्रियता को अपने हितों के लिए बाधा मान रहा था।

एक लाख रुपए की दी सुपारी

एसपी ने बताया कि संतोष राय ने आदित्य वर्मा को एक लाख रुपए में हत्या की सुपारी दी थी। आदित्य ने अपने साथियों पुष्पेंद्र सिंह उर्फ प्रिंस, अंकित बैरवा और एक अन्य युवक को योजना में शामिल किया। एक जून को आरोपियों ने मठ की रेकी की और महंत की दिनचर्या की जानकारी जुटाई। वारदात से पहले संतोष राय जयपुर में पैर की सर्जरी के बहाने अस्पताल में भर्ती हो गया ताकि उस पर शक न जाए।

पुलिस के अनुसार 5 जून की रात आरोपी दो मोटरसाइकिलों पर मठ पहुंचे। उन्होंने पहले नंदनवन के कमरे को बाहर से बंद किया और फिर महंत देवानंद के कमरे में घुसकर हमला कर दिया। जान बचाने के लिए बाहर निकले महंत पर भी चाकुओं से ताबड़तोड़ वार किए गए, जिससे उनकी मौत हो गई थी।

Kota Mahant Devanand Murder Case (Patrika Photo)

ऐसे पहुंची पुलिस आरोपियों तक

घटनास्थल के आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं होने से जांच चुनौतीपूर्ण थी। एसआईटी, साइबर सेल और डीएसटी की टीमों ने मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण किया। मठ से जुड़े संतों, ट्रस्ट पदाधिकारियों, ग्रामीणों और सक्रिय अपराधियों से पूछताछ की गई। तकनीकी साक्ष्यों में कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबरों और संपर्कों की जानकारी सामने आई। इन सुरागों के आधार पर पुलिस मुख्य साजिशकर्ता संतोष राय तक पहुंची। पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के मिलान के बाद पूरी साजिश का खुलासा हुआ और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

मठ की संपत्ति और ट्रस्ट बना विवाद का केंद्र

चंद्रेसल मठ के नाम करीब 750 बीघा भूमि और खातों में 4.33 करोड़ रुपए से अधिक राशि जमा है। पुलिस के अनुसार नई और पुरानी कार्यकारिणी के बीच कानूनी संघर्ष चल रहा था। महंत देवानंद द्वारा नई कार्यकारिणी को सक्रिय किए जाने और धार्मिक गतिविधियों के विस्तार से विवाद और गहरा गया। जांच में सामने आया कि ट्रस्ट और संपत्ति पर नियंत्रण की लड़ाई ही इस बहुचर्चित हत्याकांड की मुख्य वजह बनी।

Updated on:
11 Jun 2026 07:14 pm
Published on:
11 Jun 2026 06:49 pm