आज हम बात कर रहे कोरोना वॉरियर्स के रूप में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले कोटा के मेडिकल ऑफिसर डॉ. अनुराग शर्मा की। वे कोरोना से जंग के कारण दो माह से घर-परिवार से दूर हैं।
कोटा. आज हम बात कर रहे कोरोना वॉरियर्स के रूप में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले कोटा के मेडिकल ऑफिसर डॉ. अनुराग शर्मा की। वे कोरोना से जंग के कारण दो माह से घर-परिवार से दूर हैं। वे झालावाड़ जिले के एक छोटे से गांव रवासिया के प्राथमिक चिकित्सा के न्द्र से जुड़े हैं। वे पूरे गांव में घर-घर घूमकर ग्रामीणों को इस वैश्विक संक्रमण से बचने के लिए जागरूक कर रहे हैं। साथ ही, उनका उपचार भी कर रहे हैं। मध्यप्रदेश की सीमा से जुड़े इस गांव से गुजरते श्रमिकों व मजदूरों की चिकित्सकीय जांच का कार्य भी कर रहे हैं।
पत्रिका से बातचीत में उन्होंने बताया कि भले ही मैं परिवार से दूर हूं, लेकिन मेरा परिवार आत्मिक रूप से मुझे धैर्य व हिम्मत दे रहा है। इस संकट की घड़ी में जब मैं अपने बच्चों का चेहरा याद करता हूं तो मुझे गांव के मासूम बच्चे और लोगों का चेहरा भी याद रहता है। चिकित्सक समुदाय के धैर्य, निष्ठा और सेवाभाव पर जब पूरा विश्व उन्हें सलाम कर रहा है तो आज मुझे अपने चिकित्सक होने पर गर्व होता है। वास्तव में चिकित्सक बनने का संकल्प व सपना देखने वाले विद्यार्थियों से मेरा यही कहना है कि ये पथ भले ही फू लों की सेज से सजा न हो, लेकिन ईश्वर के बाद यदि इस संसार में कोई स्थान पाता है तो वो चिकित्सक ही है और ऐसा सम्मान और विश्वास सभी सुख-सुविधाओं से बहुत ऊपर है। एक चिकित्सक के लिए सबसे प्रमुख गुण है, उसकी मानवता के प्रति निष्ठा और सेवा का संस्कार।