कोटा. भारत विकास परिषद के आयुर्विज्ञान संस्थान की ओर से आयोजित तीन दिवसीय पांचवीं अखिल भारतीय सुसंस्कृत स्वास्थ्य सेवा कार्यशाला का शुभारंभ सुभाष नगर स्थित पोरवाल भवन में हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भैयाजी जोशी ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
कोटा. भारत विकास परिषद के आयुर्विज्ञान संस्थान की ओर से आयोजित तीन दिवसीय पांचवीं अखिल भारतीय सुसंस्कृत स्वास्थ्य सेवा कार्यशाला का शुभारंभ सुभाष नगर स्थित पोरवाल भवन में हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भैयाजी जोशी ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
कार्यक्रम के शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए भैयाजी जोशी ने कहा कि संघ से जुड़े कार्यकतर्धओं का दृष्टिकोण सदैव समाज-केंद्रित होना चाहिए। समाज की पीड़ा को अपना दुख मानकर सेवा करना ही संघ का मूल विचार है। उन्होंने कहा कि हम सभी समाज का ही हिस्सा हैं, इसलिए अपनी पूरी क्षमता, ज्ञान और निष्ठा का उपयोग समाज की भलाई के लिए करना हमारा दायित्व है।
भैयाजी जोशी ने कहा कि संघ से जुड़े लोग किसी भी क्षेत्र में कार्यरत हों, वे बिना किसी लोभ, लालच या स्वार्थ के समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर कार्य करते हैं। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कार्यरत कार्यकर्ताओं को भी इसी भाव के साथ सेवा कार्य करना चाहिए, जहां मानवता, संवेदना और सेवा-भाव सर्वोपरि हो। उन्होंने संघ की कार्यशैली को स्पष्ट करते हुए कहा कि सामाजिक सेवा में चार तत्व अत्यंत आवश्यक है, पहला प्रतिबद्धता, दूसरा निरंतरता, तीसरा सतत प्रयास और चौथा विश्वसनीयता। कार्यकर्ता को सफलता और विफलता, आशा और निराशा से ऊपर उठकर कार्य करना चाहिए तथा जिस कार्य को हाथ में लिया है, उसे समाधान तक पहुंचाना चाहिए।
भैयाजी जोशी ने कहा कि समाज और व्यक्ति अलग नहीं हैं। समाज की जो कठिनाई है, वही व्यक्ति की भी कठिनाई है। भारतीय चिंतन समग्रता पर आधारित है और संघ का कार्य समाज में जो चल रहा है उसे देखने तक सीमित नहीं, बल्कि उसमें सकारात्मक परिवर्तन लाने का है। उन्होंने कहा कि आज समाज में विभिन्न प्रकार के प्रदूषण और चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन संघ कार्यकर्ता पूरे सामर्थ्य के साथ डटकर खड़े रहते हैं और समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य करते हैं। इस उद्देश्य से आयोजित सुसंस्कृत स्वास्थ्य सेवा कार्यशाला स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत लोगों को सेवा के संस्कारों से जोड़ने का प्रयास है।
डॉ. पूर्णेन्दु सक्सैना ने स्वास्थ्य सेवा में स्वयंसेवकत्व की अवधारणा पर विचार रखते हुए बताया कि संघ की मूल दृष्टि व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण केवल नारा नहीं, बल्कि आचरण का मार्ग है। समाज में स्थायी परिवर्तन शासन से नहीं, बल्कि संस्कारित व्यक्तियों के माध्यम से होता है। स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवकों के लिए आवश्यक है कि वे अपने
निर्णयों में निस्वार्थ भाव रखें। आज के व्यावसायिक और जटिल चिकित्सा वातावरण में अनेक अपेक्षाओं और दबावों के बीच नैतिक आचरण कठिन हो जाता है, परंतु सेवा-बस्तियों और समाज के संपर्क से चिकित्सकों में आत्मीयता और सेवा का संस्कार विकसित होता है। जब चिकित्सक मरीज को केवल केस नहीं बल्कि अपना मानता है, तब उसके निर्णयों में स्वार्थ कम होकर सेवा का आनंद प्रमुख हो जाता है। स्वयंसेवकत्व का अर्थ है जहां हैं, वहीं से सही दिशा में एक कदम आगे बढ़ना। अपने लाभ को सीमित कर, सहयोगियों को साथ लेकर, जरूरतमंदों के लिए विशेष प्रयास करना ही सुसंस्कारित स्वास्थ्य सेवा है। उपदेश देने के बजाय आचरण से प्रेरणा देना अधिक प्रभावी है।
समाज परिवर्तन से ही व्यवस्था परिवर्तन संभव है। स्वास्थ्य केवल डॉक्टरों का विषय नहीं, बल्कि समाज का विषय है। छोटे स्वास्थ्य शिविरों से लेकर अस्पताल, क्लिनिक, ब्लड बैंक जैसे प्रकल्पों तक, स्वयंसेवकों की सामाजिक दृष्टि विकसित होती है और समाज आत्मनिर्भर बनता है। भारत की परंपरा समाज-केंद्रित है, न कि केवल बाजार या शासन-केंद्रित। कॉर्पोरेट या पूर्णतः सरकारी मॉडल की सीमाओं के बीच सामाजिक-धार्मिक संस्थानों द्वारा संचालित स्वास्थ्य संस्थाएं अधिक आत्मीय और नैतिक वातावरण प्रदान कर सकती हैं। भविष्य में ऐसी संस्थाओं की भूमिका बढ़नी चाहिए, परंतु इसके लिए उन्हें सक्षम और संगठित बनाना भी आवश्यक है। नीति-निर्माताओं सहित जिम्मेदार स्थानों पर बैठे स्वयंसेवकों का दायित्व है कि वे समाज को सशक्त बनाएं, सामाजिक संस्थाओं को सक्षम करें और स्वास्थ्य नीति को सकारात्मक, सहयोगी और स्वावलंबी दिशा दें। अंततःस्वयंसेवकत्व का अर्थ समाज को अपने पैरों पर खड़ा करना, निस्वार्थ सेवा का संस्कार विकसित करना, और राष्ट्र जीवन में भारतीय दृष्टि का व्यावहारिक प्रगटीकरण करना है।
मंच पर सुसंस्कारित स्वास्थ्य सेवा के अध्यक्ष डॉ. जयंती भाई बाड़ोसिया, भारत विकास परिषद के संरक्षक श्याम शर्मा, आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रमेश अग्रवाल भी मंचासीन रहे। कार्यक्रम में भारत विकास परिषद चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र के अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता एवं महामंत्री अशोक वशिष्ठ ने बताया कि कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए चिकित्सकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश विजयवर्गीय, विजय सिंह, रवि विजय, मनोज विजय, नरेन्द्र पोरवाल, ओमप्रकाश गुप्ता, हरिओम विजय, मनोज कोठारी, डॉ. अनुज सिंघल, सचिन जम्भोरकर, डॉ. रत्नेश खरे, डॉ. अशोकराव कुकड़े, डॉ. रमेश अग्रवाल, क्षेत्रीय संचालक डॉ. जयंती भाई समेत बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन मौजूद रहे।