कोटा

Special Story: खजाना भरने में जुटी राजस्थान सरकार, बिजली चोरों को दिया अभयदान

Kota News, Kota Hindi news, Electricity Theft: खाली खजाना भरने के लिए राज्य सरकार बिजली चोरों को अभयदान देने में जुटी है।
3 min read
• •
Jun 27, 2019
Electricity theft
Special Story: खजाना भरने में जुटी राजस्थान सरकार, बिजली चोरों को दिया अभयदान

कोटा. खाली खजाना भरने के लिए राज्य सरकार ( Rajasthan Government ) बिजली चोरों को अभयदान देने में जुटी है। बिजली चोरों ( electricity theft ) के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सबक सिखाने के बजाय महज जुर्माना वसूलकर उलटा दूसरे लोगों को बिजली चोरी करने का हौसला दे रही है। नतीजतन, जुर्माने से सरकार को जितना राजस्व नहीं मिलता, बिजली चोर उससे कई गुना ज्यादा कीमत की बिजली चुरा कर सरकार और ईमानदारी से बिजली बिल का भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं की जेब पर खुला डाका डाल देते हैं।


जयपुर विद्युत वितरण निगम (जेवीवीएनएल) ( Jaipur Electricity Distribution Corporation ) की विजिलेंस टीम ( electricity vigilance ) ने बीते पांच साल में कोटा जिले के 46,399 घरों और प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की। इसमें से 32229 जगहों पर लोगों को बिजली चोरी करते हुए पकड़ा। बिजली चुरा रहे लोगों के ठिकानों का जब एसेसमेंट किया गया तो विजिलेंस ने करीब 25.30 करोड़ रुपए की चोरी का अनुमान लगाया, लेकिन सरकारी नियमों की आड़ में उपभोक्ताओं ने अपील की तो विभाग को आधा जुर्माना ( electricity theft penalty ) यानी 12.69 करोड़ रुपए की ही वसूली कर काम चलाना पड़ा।

Read More: कोटा के आईटीआई कॉलेज में मिला युवक का कटा हाथ, 200 मीटर दूर पड़ी थी लाश, लोगों में दहशत

बच निकले ज्यादातर बिजली चोर
सूत्रों की मानें तो सरकार राजनीतिक दबाव के चलते बिजली चोरी को संज्ञेय अपराध घोषित नहीं कर पा रही। ऐसे में ऊर्जा विभाग और निगम के अफसर मानते हैं कि जुर्माने के तौर पर जितना ज्यादा पैसा आ जाए, वही काफी है। इसी के चलते अकेले कोटा जिले में पिछले पांच साल में 25036 बिजली चोर महज एसेसमेंट से भी आधा जुर्माना चुकाकर बच निकले। जबकि इनमें से 13,208 लोग तो ऐसे थे जो पूरी तरह से अवैध लाइन या फिर मीटर से पैरलल सर्विस लाइन डालकर बिजली चुरा रहे थे।

Read More: आंखों की जांच करवाकर घर लौट रहे दो भाइयों को ट्रैक्टर ने कुचला, बुझ गए दोनों परिवार के इकलौते चिराग

कानून पर भारी सियासत
बिजली चोरों को पकड़ते ही उन्हें छुड़ाने के लिए सियासी सिफारिशों का अम्बार लग जाता है। हालात इस कदर खराब हैं कि चुनावी साल में सियासी नफे नुकसान के मद्देनजर सरकार बिजली चोरों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई पर ही प्रतिबंध लगा देती है। वित्त वर्ष 2018-19 में सरकार ने बिजली चोरी के खिलाफ विजिलेंस कार्रवाई पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। नतीजतन, पूरे साल में विजिलेंस विंग ने कोटा जिले में महज पांच जगह की चैकिंग कर बिजली चोरी पकड़ी।

Read More: दबंगों ने चोर समझ राहगीर को जमकर पीटा, खंभे से बांध मारे डंडे, महिलाओं ने चप्पलें तो युवाओं ने बरसाए थप्पड़, देखि‍ए वायरल वीडि‍यो...

मुनाफे का जरिया बनी निजी कंपनियां
बिजली चोरी रोकने में नाकाम रहने पर जब सरकारी विद्युत कंपनियां बुरी तरह घाटे में जाने लगीं तो सरकार ने सबसे ज्यादा बिजली चोरी वाले इलाकों की विद्युत सप्लाई निजी हाथों में सौंपने का फैसला लिया। इससे सरकार को कुल विद्युत उपभोग का पूरा पैसा एक साथ मिल गया और बिजली चोरों की लगाम करने के लिए माथा पच्ची भी नहीं करनी पड़ी, लेकिन इस सौदे से निजी कंपनियों की हालत फिलहाल पस्त हो गई। केईडीएल को शुरुआती साल वर्ष 2016-17 में बिजली चोरों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने के निर्देश दिए गए।

नतीजतन, बिजली चोरों की पौ बारह हो गई और उन्होंने महज सात महीने में ही 14 करोड़ यूनिट बिजली चुरा ली। केईडीएल ने इसके बाद भी चोरी हुई बिजली का सरकार को 80.80 करोड़ रुपया भुगतान किया। वहीं कोटा शहर में वर्ष 2017-18 में 33.50 करोड़ यूनिट बिजली चोरी हुई, जिसकी एवज में केईडीएल को 199 करोड़ रुपए और वर्ष 2018-19 में 30 करोड़ यूनिट चोरी हुई बिजली की एवज में सरकार को 180 करोड़ रुपए चुकाने पड़े। हालांकि वसूली के नाम पर सरकारी नीतियों के चलते निजी कंपनी बिजली चोरों से सिर्फ 2.19 करोड़ रुपए ही वसूल सकी।

Published on:
27 Jun 2019 09:30 am