
कोटा. इस शिक्षा सत्र में कोचिंग संस्थानों एवं हॉस्टलों के लिए विद्यार्थियों को तनावमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने गाइडलाइन जारी की है। इसकी तैयारी बैठक मंगलवार को जिला कलक्टर गौरव गोयल की अध्यक्षता में टैगोर सभागार में हुई।
जिला कलक्टर ने कहा कि स्ट्रेस फ्री सिटी के लिए सभी संस्थाओं को मिलकर कार्य करना होगा। शिक्षा विभाग ने कोटा में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए मानसिक सम्बलन एवं सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
सभी संस्थानों को इन निर्देशों की पालना सुनिश्चित करते हुए विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना होगा। उन्होंने कोचिंग संस्थानों में अपनाई जा रही पद्धति को अपडेट कर गाइड लाइन के अनुसार प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा कोचिंग संस्थानों एवं छात्रावासों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
यह गाइड लाइन
जिला स्तर पर कलक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति नियामक संस्था के रूप में कार्य कर दिशा-निर्देशों की पालना कराएगी।
पुलिस, चिकित्सा, नगरीय विकास, नगरीय निकाय विभागों द्वारा समस्त कोचिंग संस्थानों एवं छात्रावासों के प्रबंधन को नियंत्रित किया जाएगा। निर्देशों की अवहेलना पर विभाग कानूनी कार्रवाई करेंगे।
विद्यार्थियों व अभिभावकों का जिला प्रशासन से सीधा सम्पर्क रहे, इसके लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। यह शिकायतों, समस्याओं का विवरण जिला समिति को 48 घंटे में पेश करेगा। जिला समिति तुरन्त निस्तारण कर संबंधित संस्थान, छात्रावास संचालक अथवा विभाग को निर्देशित करेगी।
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कोचिंग संस्थान इजी एग्जिट पॉलिसी व फीस रिफण्ड के संबंध में विद्यार्थियों व अभिभावकों को प्रवेश के दौरान ही सूचित करें, इसे ब्रोशर में भी सम्मिलित किया जाए।
कोचिंग परिसर में ही एक ई-लर्निंग सेन्टर स्थापित किया जाएगा, कोई भी विद्यार्थी जो लेक्चर्स में उपस्थित नहीं हो पाया, वह ई-लेक्चर्स को रिकॉर्ड कर सकेगा।
हकीकत यह
छात्रावासों में विद्यार्थियों को दी जाने वाली कोई सुविधा अंकित नहीं।
कोचिंग एरिया में परीक्षा के दौरान लाउड स्पीकर का शोर गूंजता रहता है। पुलिस को सूचना देने के बावजूद नियंत्रण नहीं किया जाता है।
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कोचिंग संस्थानों में प्रशिक्षित मनोविशेषज्ञों की कोई सुविधा प्रदान नहीं की जाती है। आत्महत्याएं बढऩे के बाद मेडिकल कॉलेज में पिछले दिनों मनोविशेषज्ञों की ट्रेनिंग
दी गई।
तीन दिन तक विद्यार्थी बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहने पर कोचिंग व हॉस्टल स्टाफ देखने तक नहीं जाता है। अभिभावक को भी कोई जानकारी नहीं दी जाती है।
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विद्यार्थी यदि बीच में कोचिंग छोड़कर जाना चाहता है तो कोचिंग व हॉस्टल संचालक कोई फीस रिफंड नहीं करते हैं। विद्यार्थी व अभिभावक चक्कर लगाते रहते हैं।