कोटा

चुनावी नारों में त्रीकोणिय मुकाबला: भाजपा-कांग्रेस को कड़ी टक्कर दे रहा स्वीप, पढि़ए कैसे-कैसे नारे…

लोकसभा चुनाव में एक बार फिर नारों की बहार आ गई है। सोशल मीडिया से लेकर हर ओर ऐसे-ऐसे नारे गढ़े जा रहे हैं।
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Apr 14, 2019
Election slogan
चुनावी नारों में त्रीकोणिय मुकाबला: भाजपा-कांग्रेस को कड़ी टक्कर दे रहा स्वीप, पढि़ए कैसे-कैसे नारे...

- आकर्षक नारे दे रहे मतदान का संदेश

- राजनीतिक दल एक-दूसरे के विरोध में कर रहे नारों का उपयोग

कोटा. Lok Sabha Election में एक बार फिर नारों की बहार आ गई है। social media से लेकर हर ओर ऐसे-ऐसे नारे गढ़े जा रहे हैं, जो लोगों को लम्बे चौड़े भाषणों की जगह वन लाइनर पंच से सब कुछ समझा सकें। दरअसल, आजादी के बाद से चुनावों में नारों की अहम भूमिका रही है। एक वोट न घटने पाए, एक वोट न बंटने पाए... जैसे election slogans बनने का सिलसिला खूब चला। चुनाव में social media पर यह नारा बना 'तोड़ दो सारे बंधन को, वोट करो गठबंधन को।

जब यह नारा लोगों की जुबान पर चढऩे लगा तो विरोध में एक नारा आया 'लहर नहीं आंधी बना दो, ठगबंधन की समाधि बना दो। ऐसे एक नहीं कई नारे बने जो एक-दूसरे के विरोध में तैयार हुए। भाजपा कार्यकर्ता 'मैं भी चौकीदार का नारे देकर लोगों को जोडऩे का जतन कर रहे हैं, तो कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसका जवाब देने के लिए 'मैं भी रामनारायणÓ का नारा सोशल मीडिया पर चलाया है।

सियासी दल भले ही कितने ही नारे दें, लेकिन इन सबके बीच इस लोकसभा चुनाव में जागरूकता से जुड़े नारों में जिला निर्वाचन विभाग आगे है। चुनाव आयोग की पहल पर फिल्मी तर्ज पर नारे और डायलॉग तैयार कराए गए हैं। जिला निर्वाचन विभाग मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिए मतदाता जागरूकता कार्यक्रम (स्वीप) चला रहा है। इसमें नारों का जमकर उपयोग हो रहा है।

'चंबल माता रौ कहणो है, 29 अप्रेल कू वोट जरूर देणो हैÓ, 'भारत में लोकतंत्र, वोट इसका मूलमंत्रÓ, 'बहकावे में कभी न आना, सोच समझकर बटन दबानाÓ, 'समय वोट के लिए निकालें, जिम्मेदारी कभी न टालेंÓ जैसे कई नारे शहर देहात में गूंज रहे हैं। होर्डिंग्स और बैनरों पर भी नजर आ रहे हैं। मतदाता जागरूकता कार्यक्रम (स्वीप) का उद्देश्य चुनाव में हर मतदाता की भागीदारी सुनिश्चित करना और सही उम्मीदवार चुनने के लिए प्रेरित करना है। इसके साथ ही निर्भीक होकर मतदान करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।

पहले जैसे रोचक नारे नहीं रहे
सियासी दलों से जुड़े पुराने कार्यकर्ताओं की मानें तो मौजूदा लोकसभा चुनाव में नारे पहले जैसे न रोचक रहे न ही हलके-फुल्के तंजों से भरे तीखे वार करने वाले। अब तो नारों की दुनिया सिर्फ और सिर्फ निजी हमलों पर केंद्रित हो गई है। एक वक्त था कि नेता लोगों को लुभाने के लिए रोचक नारे गढ़ते थे। कवियों, साहित्यकारों की टीम लगाई जाती थी। यह नारे न केवल सियासी बहार को धार देते थे, बल्कि आम आदमी के जेहन में बरसों तक रहते थे। अबकी बार फिर मोदी सरकार, मोदी है तो मुमकिन है आदि नारे भाजपाइयों के बीच गूंज रहे हैं। इसके साथ ही कांग्रेस ने अपने चुनावी एजेंडे को धार देते हुए नारा दिया है 'गरीबी पर वार 72 हजार...।

Published on:
14 Apr 2019 09:31 am