
कोटा. संभाग की सबसे बड़ी भामाशाहमंडी कृषि जिंसों की भारी आवक के चलते अब छोटी पडऩे लगी है। इस कारण सीजन में बार-बार मंडी को बंद करना पड़ रहा है। इसका खमियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। हाड़ौतीभर से आने वाले किसानों को जिंस बेचने के लिए दो-तीन दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
सरकारी अधिकारियों की उदासीनता के कारण भामाशाहमंडी के विस्तार की योजना करीब एक दशक से लालफीताशाही की फाइलों में दबी पड़ी है। हर बार सीजन में मंडी के विस्तार की मांग उठती है, लेकिन अधिकारी विस्तार पर कोई ध्यान नहीं देते। अफसरों की लापरवाही से हाड़ौती का किसान काफी नाराज है। हाड़ौती संसदीय क्षेत्र में सबसे ज्यादा मतदाता किसान ही है। ऐसे में अफसरों की लापरवाही का खामियाजा कांगे्रस सरकार को लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।
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प्रस्ताव तैयार किए, लेकिन अफसर आगे नहीं बढ़ा रहे
जनप्रतिनिधियों और किसानों के दबाव में भामाशाहमंडी के विस्तार का प्रस्ताव एक दशक पहले तैयार किया गया था। इसमें मंडी से सटी वन विभाग की 92 हैक्टेयर जमीन मंडी के लिए लेने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। यह प्रस्ताव जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार को भेजा गया, लेकिन बाद में सरकारी सुस्ती के कारण विस्तार की फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई। पिछले साल कोटा ग्रेन एण्ड सीड्स मर्चेन्ट एसोसिएशन के प्रयासों से राज्य सरकार ने वन विभाग को जमीन के बदले जमीन देने का प्रस्ताव तैयार कर केन्द्र सरकार को भेज दिया था। केन्द्रीय एम्पवार्ड कमेटी (सीईसी) में यह फाइल भेजी गई थी, लेकिन सीईसी की मुहर लगने से पहले लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई, इस कारण फिर मंडी के विस्तार का मसला अटक गया।
हाड़ौती ही नहीं मध्यप्रदेश से भी आते हैं किसान
भामाशाहमंडी प्रदेश की सबसे अधिक राजस्व देने वाली मंडी है। इस मंडी में हाड़ौती के अलावा मध्यप्रदेश के एक दर्जन जिलों के किसान माल लेकर आते हैं। इसका मुख्य कारण अन्य मंडियों के मुकाबले भाव अधिक मिलना और केश भुगतान होना है। पारदर्शिता से जिंसों की नीलामी होना। सोयाबीन, धान, सरसों, गेहूं तथा धनिये के विपणन में यह मंडी अव्वल है। बड़े निर्यातक और खरीदार सीधे यहां से माल खरीदते हैं।
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ये है व्यवस्था
मंडी प्रशासन द्वारा प्रतिदिन दोपहर दो बजे से लेकर रात 11 बजे तक तथा सुबह 6 से 9 बजे तक मंडी का मुख्य गेट बंद रखा जा रहा है। इस दौरान किसानों को मंडी के बाहर
ही ट्रैक्टर-ट्रॉली में अनाज भरकर खड़ा रहने को विवश होना पड़ रहा है।
जन एजेण्डा बैठकों में भी उठा था मुद्दा
पत्रिका की ओर से पिछले दिनों संभागभर में करवाई गई जन एजेण्डा मीटिंगों में व्यापारियों और किसानों ने मंडी के विस्तार की मांग उठाई थी। पत्रिका के टीवी शो में भी यह मामला प्रमुखता से उठा था। इसमें भाजपा प्रत्याशी ओम बिरला और कांग्रेस प्रत्याशी रामनारायण मीणा ने मंडी विस्तार का मुद्दा प्राथमिका से उठाने की बात कही थी।
मंडी का जब तक विस्तार नहीं होगा, किसानों को हर बार सीजन में इसी तरह परेशानी झेलनी पड़ेगी। राज्य सरकार को मंडी के विस्तार की योजनाओं को अमलीजामा पहनाना होगा। कोरी बातें करने से कुछ नहीं होगा।
दशरथ कुमार, किसान नेता
पिछले कई सालों से मंडी के विस्तार के लिए प्रयासरत हैं। एक साल में मंडी के विस्तार की फाइल केन्द्रीय एम्पवार्ड कमेटी तक पहुंच गई थी। विस्तार के लिए प्रयास कर रहे हैं। 92 हैक्टेयर जमीन वन विभाग की मंडी विस्तार के लिए दिया जाना प्रस्तावित है।
अविनाश राठी, अध्यक्ष, कोटा ग्रेन एण्ड सीड्स मर्चेन्ट्स एसोसिएशन