कोटा में भाजपा ने इसे काला कानून बताया है। वहीं विधि मंत्री शांति धारीवाल का तर्क है कि संशोधन ये नहीं कहता कि ऐसे विवाह मान्य होंगे। जिला कलक्टर चाहें तो उन पर कार्रवाई कर सकते हैं। यह संशोधन केंद्रीय कानून का विरोधाभास नहीं है। उच्चतम न्यायालय का भी फैसला है कि विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन होना चाहिए।

कोटा. विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया अब विवाह होने के 30 दिन में अवधि में करनी होगी। इसमें बाल विवाह का पंजीकरण भी अनिवार्य किया गया है। इस संशोधन को भाजपा ने काला कानून बताया है। शहर भाजपा अध्यक्ष कृष्ण कुमार सोनी ने कहा, भाजपा इसके खिलाफ है। देहात भाजपा जिलाध्यक्ष मुकुट नागर ने कहा, सदन में भाजपा ने इसका विरोध किया। शहर महामंत्री मुकेश विजय और अन्य पदाधिकारियों ने भी इसे काला कानून बताया है। राज्य विधानसभा ने शुक्रवार को राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक 2021 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। अब विवाह होने के 30 दिन के भीतर विवाह रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करना अनिवार्य होगा। साथ ही जो वर-वधु जिस स्थान पर 30 दिन से अधिक समय से निवास करते आ रहे हो, वह उस स्थान से संबंधित विवाह रजिस्ट्रेशन अधिकारी के समक्ष भी आवेदन ज्ञापित कर सकते हैं। इससे पहले संसदीय मामलात मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने विधेयक पर हुई चर्चा के जवाब में बताया कि इस संशोधन के बाद अब विवाहित जोड़ा या वर ने 21 और वधू ने 18 वर्ष की आयु पूर्ण नहीं की हो तो उनके माता-पिता या संरक्षक को विवाह होने की तारीख से 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रार को आवेदन ज्ञापित करना होगा। उन्होंने बताया कि हर विवाहित को (चाहे बाल विवाह ही क्यों नहीं हो) रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि संशोधन ये नहीं कहता कि ऐसे विवाह वैध होंगे। जिला कलक्टर चाहें तो उन पर कार्रवाई कर सकते हैं। यह संशोधन केंद्रीय कानून का विरोधाभास नहीं है। उच्चतम न्यायालय का भी फैसला है कि विवाहों के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन होना चाहिए। धारीवाल ने कहा कि अब जिला विवाह रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के साथ-साथ अपर जिला विवाह रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और ब्लॉक विवाह रजिस्ट्रीकरण अधिकारी स्तर पर भी रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा। ये अधिकारी रजिस्ट्रीकरण के कार्य को निगरानी और पुनरीक्षित कर सकेंगे। इसे आमजन को रजिस्ट्रीकरण कराने में आसानी हो सकेगी। इससे कार्यों में सरलता और पारदर्शिता आएगी।संसदीय मामलात मंत्री ने कहा कि विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र विधिक दस्तावेज है। इसके नहीं होने से, विधवाओं को कई योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। अब अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण से वर-वधु में से किसी एक की या दोनों की भी मृत्यु होने पर भी परिजन विवाह रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकेंगे। इससे पहले सदन ने विधेयक को प्रचारित करने के सदस्यों के प्रस्ताव को ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया।