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Kota: सगे भाइयों की बेटियों ने किया कमाल, एक साथ पास की असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा, पहले से थीं सरकारी नौकरी में

Assistant Professor Inspirational Story: कोटा जिले के डूंगरज्या गांव की 2 बेटियों ने आरपीएससी की असिस्टेंट प्रोफेसर (संस्कृत) भर्ती परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
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कोटा

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Akshita Deora

Jul 24, 2026

RPSC Success Story

डूंगरज्या गांव की बेटियां अनुपमा पाठक और प्रेमलता पाठक की फोटो: पत्रिका

2 Sisters Become Assistant Professor: कोटा जिले के दीगोद क्षेत्र के डूंगरज्या गांव की 2 बेटियों ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) की असिस्टेंट प्रोफेसर (संस्कृत) भर्ती परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर परिवार और पूरे गांव का नाम रोशन किया है। खास बात यह है कि दोनों पहले से ही सरकारी सेवा में कार्यरत हैं लेकिन नौकरी के साथ निरंतर मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता प्राप्त कर नई मिसाल कायम की है।

2 भाइयों की बेटियों ने कर दिया कमाल

जानकारी के अनुसार गांव निवासी 2 सगे भाइयों की बेटियों ने कमाल कर दिया। दरअसल खेमराज पाठक की पुत्री प्रेमलता पाठक ने आरपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर (संस्कृत) भर्ती परीक्षा में 36वीं रैंक हासिल की है। वहीं उनके भाई ऋषिराज पाठक की पुत्री अनुपमा पाठक ने 14वीं रैंक प्राप्त कर असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए चयन सुनिश्चित किया। दोनों की इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पूरे गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने दोनों बेटियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

परिजनों में खुशी का माहौल

अनुपमा पाठक वर्तमान में राजकीय विद्यालय में वरिष्ठ अध्यापक (संस्कृत) के पद पर कार्यरत हैं। वहीं प्रेमलता पाठक व्याख्याता (संस्कृत) के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। सरकारी नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच नियमित अध्ययन, समय का बेहतर प्रबंधन और लक्ष्य के प्रति समर्पण ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। दोनों ने यह साबित किया कि यदि दृढ़ संकल्प और मेहनत हो तो नौकरी के साथ भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की जा सकती है। परिजनों ने बताया कि दोनों ने लंबे समय तक लगातार तैयारी की और अपने विषय पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। परिवार का सहयोग और आत्मविश्वास भी उनकी सफलता में महत्वपूर्ण रहा। परिणाम घोषित होने के बाद घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। रिश्तेदारों, मित्रों और ग्रामीणों ने मिठाई खिलाकर दोनों की सफलता का जश्न मनाया।

दोनों बेटियों की उपलब्धि क्षेत्र की अन्य छात्राओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उनकी सफलता ये संदेश देती है कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और निरंतर प्रयास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। कोटा जिले के डूंगरज्या गांव की इन दोनों प्रतिभाशाली बेटियों ने अपने परिवार का गौरव बढ़ाया है।