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नया कोरोना वायरस खतरे की घंटी, शादियों के सीजन में ब्रिटेन से 23 लोग कोटा आए

कोटा. राज्य सरकार ने लंदन से राजस्थान कोटा आने वाले 23 यात्रियों की सूची जारी की है। ये यात्री बीते दो माह नवम्बर व दिसम्बर में कोटा पहुंचे हैं। ये यात्री पहले दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे। उसके बाद कोटा आए है। सबसे अंतिम यात्री 20 दिसम्बर को ही कोटा पहुंचा है। इस सूचना से जिला प्रशासन व चिकित्सा महकमे हड़कम्प मचा हुआ है।

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Dec 24, 2020
नया कोरोना वायरस खतरे की घंटी, शादियों के सीजन में ब्रिटेन से 23 लोग कोटा आए

कोटा. राज्य सरकार ने लंदन से राजस्थान कोटा आने वाले 23 यात्रियों की सूची जारी की है। ये यात्री बीते दो माह नवम्बर व दिसम्बर में कोटा पहुंचे हैं। ये यात्री पहले दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे। उसके बाद कोटा आए है। सबसे अंतिम यात्री 20 दिसम्बर को ही कोटा पहुंचा है। इस सूचना से जिला प्रशासन व चिकित्सा महकमे हड़कम्प मचा हुआ है।

गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने 23 दिसम्बर के अंक में कोटा में हो सकता कोरोना का नया स्ट्रेन शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया गया था कि इंग्लैण्ड में सितम्बर में वायरस के बदले ट्रेंड का पता चला था। सूची में अधिकांश उसके बाद ही यात्रा करके आए हैं। ऐसे भी लोग हो सकते हैं, जो किसी और शहर में लेंड होकर कोटा आए पहुंचे हो, क्योंकि उस समय अन्तरराज्यीय व अन्तरराष्ट्रीय आवागमन निर्बाध जारी था।

यह भी एक संभावना है कि ये लोग स्थानीय लोगों के सम्पर्क में आए हो और भारत के दूसरे शहरों में भी गए हो। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ये लोग जब कोटा आए, उस समय यहां उत्सव, समारोह व शादियों का जोर था। यह भी विचारणीय है कि बीते दो माह में कोटा में गंभीर रोगियों की संख्या व मृत्युदर में वृद्धि हुई है। युवा वर्ग भी रोग का गंभीर रूप देखने को मिला है।

यहां भी रखे निगरानी
ताजा समाचारों के अनुसार, यूके में एक नया साउथ अफ्रीका स्टे्रन पाया गया है। जिसकी संक्रामकता व अक्रामकता अधिक है। जिसके चलते ब्रिट्रेन ने साउथ अफ्रीका से आने वाली उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया है। भारत में भी साउथ अफ्रीका से आने वाले यात्रियों की निगरानी करनी होगी।

युद्ध स्तर पर प्रयास करने होंगे

नए स्ट्रेन की प्रसार क्षमता बहुत अधिक है। इसके चलते प्रसार को रोकने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास करने होंगे। जिसमें संस्थागत क्वारेंटाइन, कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग, रिपिट टेस्टिंग व मॉनिटरिंग शामिल हैं।
डॉ. मनोज सालूजा, आचार्य, मेडिसिन विभाग, कोटा मेडिकल कॉलेज

Published on:
24 Dec 2020 01:34 am
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