
कोटा. नगर निगम तीन साल के कार्यकाल में शहरी सफाई-व्यवस्था की दिशा ही तय नहीं कर पाया है। बार-बार सफाई के नाम पर प्रयोग कर करोड़ों रुपए का बजट पानी की तरह बहा दिया जाता है। दो साल में शहर में कचरा प्वाइंट बनाने पर ही ढाई करोड़ से अधिक की रकम खर्च की जा चुकी है। अब शहर को कचरा प्वाइंट मुक्त बनाने की घोषणा की गई है। यानी करोड़ों रुपए के कचरा पात्र बेकार हो जाएंगे।
शहर के 65 वार्डों में 250 से अधिक कचरा प्वाइंट हैं। कचरा प्वाइंट्स पर कचरा फैला हुआ नहीं दिखे, इसके लिए ही निगम ने मोटा बजट खर्च कर दिया है। निगम ने पिछले साल स्वच्छ भारत मिशन के तहत लोहे के करीब 50 लाख के आधुनिक कचरा पात्र खरीदे। ये डस्टबिन शहर के मुख्य कचरा प्वाइंट व वार्डों में रखे। इसके अलावा स्मार्ट कचरा प्वाइंट बनाने के नाम पर भी मोटा बजट खर्च किया जा रहा है। इसके बाद अब थेकड़ा कचरा ट्रांसफर स्टेशन को चालू करने के दौरान महापौर व आयुक्त ने घोषणा की कि जल्द शहर को कचरा प्वाइंट मुक्त किया जाएगा।
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बनाए पक्के कचरा प्वॉइंट
मौजूदा कचरा प्वाइंट्स पर कचरा फैलने की शिकायतें आने के बाद निगम ने शहर के अलग-अलग वार्डों में पक्के कचरा प्वाइंट बनाने का काम शुरू किया। इन कचरा प्वाइंट्स पर लाखों रुपए का बजट खर्च किया गया है। इसके बाद कुछ वार्डों में लोहे के भूमिगत कचरा पात्र लगाए गए।
एसएलआरएम पर खर्च किए लाखों
दो साल पहले तत्कालीन आयुक्त डॉ. शिवप्रसाद एम.नकाते के समय शहर में कचरा प्रबंधन का नया प्रयोग करते हुए एसएलआरएम प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। इसमें कचरे को वर्गीकृत कर अलग-अलग एकत्र कर उपयोग किया जाना था। करीब 40 लाख रुपए खर्च किए गए। लेकिन यह प्रयोग कुछ दिन बाद ही दम तोड़ गया।
खरीदे लाखों के आधुनिक डस्टबिन
केन्द्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण से पहले निगम ने गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र करने के लिए लाखों के डस्टबिन खरीदे। सभी वार्डों में तीन-चार जगह ये डस्टबिन रखे गए हैं। इसके अलावा पोर्टेबल डस्टबिन भी खरीदे गए। ये डस्टबिन शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अनुयोगी पड़े हैं।