
बूढादीत (कोटा). कोटा जिले के बूढ़ादीत क्षेत्र से बूंदी व सवाईमाधोपुर जिले में जाने वाले लोग आज भी शॉर्टकट के चक्कर में नावों में सफर करते हैं। इस दौरान नाव वाले क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने से भी नहीं चूकते।
सड़क मार्ग से बूंदी व सवाईमाधोपुर जिले में जाने के लिए तीस किलोमीटर का अधिक लंबा सफर तय करना पड़ता है। लंबे सफर से बचने के चक्कर में लोग नावों का सहारा लेते हैं। पिछले दिनों जिला कलक्टर ने चम्बल नदी को पार करने वाली अवैध नावों को बंद करने के आदेश दिए थे। लेकिन धड़ल्ले से अवैध नावों से चम्बल पार करवाया जा रहा है।
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पहले एक, अब दो नाव
चौथ का बरवाड़ा जाने के लिए आसपास के क्षेत्रों से सुबह से ही लोगों का यहां आने का सिलसिला शुरू हो गया है। अवैध नावों की रोकथाम के लिए प्रशासन ने आंखें मूंद रखी हैं। अनदेखी के कारण कभी भी बड़ा हादसा सकता है। सामान्य दिनों में एक नाव चलती है, जबकि चौथ माता के मेले के चलते एक नाव और अवैध रूप से चलाई जा रही है।
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क्षमता से दोगुने लोग
नाव की क्षमता 30 यात्रियों की है, लेकिन बुधवार को संचालक ने नाव में 50 से अधिक लोगों को बिठा रखा था। क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने से नाव नदी पार करते वक्त हिल रही थी।
हो चुके हैं हादसे
अवैध नावों से नदी पार करवाने से कई हादसे हो चुके है। परवन नदी में लकड़ी की नाव से लोगों को पार करवाने के दौरान बारिश में बड़ा हादसा हुआ था। इसमें पांच लोगों की नाव पलटने से मौत हो गई थी। यहां भी पिछले दिनों नदी में नाव पलट गई थी और कड़ी मशक्कत कर लोगों को सुरक्षित निकाला था।
नदी किनारे बसे गांवों में चल रही नावें
चंद्रेसल, मानसगांव, घघटाना, डोलर, रोटेदा, मंदारिया, खेड़ली फतेहपुर, नीमोदा उजाड़ आदि गांवों के पास चम्बल नदी में कीर, केवट समाज के लोग नावों का संचालन करते हैं। नावों में किसी प्रकार के सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कोई हादसा हो जाए तो यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
पाबंद करवाएंगे
दीगोद तहसीलदार नवनंद सिंह ने बताया कि चम्बल की डाउन स्ट्रीम में नाव चलाने का किसी को लाइसेंस नहीं है। न ही नाविकों को नाव संचालन का प्रशिक्षण है। जहां भी नावें चल रही है। उन्हें पाबंद किया जाएगा।