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शैलेन्द्र तिवारी
सपनों को सच करने के लिए बड़े हौसलों की जरूरत होती है। इस बात को सच साबित किया है कोटा की बेटी और संगीत विशारद सरिता राज ने। राजस्थान की धरती से निकलकर मायानगरी मुंबई तक का उनका सफर संघर्ष, साधना और समर्पण की ऐसी कहानी है, जो हर युवा को अपने सपनों के पीछे पूरी ताकत से दौडऩे की प्रेरणा देती है।
आज सरिता अपनी मधुर और भावपूर्ण गायकी से संगीतप्रेमियों के दिलों में खास पहचान बना चुकी है। हाल ही उनका नया भजन ‘कैसे जाऊं मैं पनिया भरन, सखी रे मोहे श्याम सताए’ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुआ है। अपनी सुमधुर प्रस्तुति और भावपूर्ण गायन की बदौलत यह भजन श्रोताओं का भरपूर प्यार बटोर रहा है।
जयपुर आकाशवाणी की ए ग्रेड आर्टिस्ट सरिता राज ने अपनी प्रतिभा के दम पर देश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुति दी और कई सम्मान हासिल किए। वे ‘सा रे गा मा पा’, ‘गजल सारा’ और ‘सुरीलो राजस्थान’ जैसे चर्चित कार्यक्रमों से जुड़ी रहीं और अपनी गायकी का लोहा मनवाया।
सरिता के भाई दीपक राज बताते हैं कि बचपन से ही सरिता की आवाज में एक अलग मिठास थी। स्कूल की प्रार्थनाओं, भजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में वह हमेशा सबसे अलग नजर आती थी। उनके पिता राजेन्द्र कुमार स्वयं संगीत से जुड़े थे। उन्होंने बचपन से ही सरिता को गायन-वादन की शिक्षा देना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे विभिन्न मंचों पर प्रस्तुति के अवसर मिले और सरिता ने अपनी आवाज का ऐसा जादू बिखेरा कि हर मंच पर सराहना मिली। दीपक का कहना है कि सरिता की वर्षों की साधना और समर्पण ने आज कोटा का नाम पूरे देश में गौरवान्वित किया है।
सरिता का मानना है कि युवाओं को बड़े सपने देखने चाहिए और उन्हें साकार करने के लिए निरंतर मेहनत, अनुशासन और साधना करनी चाहिए। उनका कहना है, ‘सपनों की उड़ान के लिए आसमान नहीं, हौसलों की ऊंचाई मायने रखती है। निरंतर अभ्यास, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ किया गया प्रयास एक दिन सफलता जरूर दिलाता है।’
Updated on:
16 Aug 2026 07:09 pm
Published on:
16 Aug 2026 07:09 pm
