
कोटा . फरवरी के आखिरी दिनों में भले ही सर्दी अब कम हो गई हो, लेकिन इस साल बीते तीन महीनों नवम्बर से जनवरी तक शहर के फुटपाथों पर 12 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। उनकी मौत के पीछे बीमारी और दूसरे कारण गिनाए गए। अलबत्ता सर्दी भी इन मौतों के पीछे बड़ा कारण रही। फुटपाथ पर फटेहाल सोने वाले इन लोगों के सिर पर न छत होती है, न ओढऩे-बिछाने के पर्याप्त बिस्तर। उनकी मौत पर कोई हल्ला भी नहीं हुआ। न कोई एनजीओ बोला, न किसी राजनीतिक दल ने इतनी फुर्सत निकाली, जो यह कहता कि फुटपाथ पर ठिठुरकर लोग जान गंवा रहे हैं। इसका कारण मरने वाले सभी अज्ञात थे। उनके नाम-पते तक पता नहीं चले।
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पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार नवम्बर 2017 से जनवरी 2018 तक जिन 12 अज्ञात लोगों की मौत हुई। उनमें किशोरपुरा और भीमगंजमंडी थाना क्षेत्र में 4-4, रामपुरा कोतवाली क्षेत्र में 2 और नयापुरा व कैथूनीपोल क्षेत्र में 1-1 व्यक्ति शामिल है। ये तीन महीन ऐसे हैं, जिनमें सर्दी शुरुआत से लेकर अपने पूरे चरम पर रहती है। ऐसे में फुटपाथों पर रहने वाले अधिकतर लोग बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं। साथ ही, कई लोग ऐसे हैं जिनकी खुले में सोने से सर्दी के कारण मौत हो जाती है। हालांकि मौत का असली कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही होगा, लेकिन प्रथम दृष्टया यही दो कारण सामने आए हैं।
इनकी हुई मौत
किशोरपुरा थाना क्षेत्र में 13 नवम्बर को 35 वर्षीय व्यक्ति की, 20 दिसम्बर को 60 वर्षीय वृद्ध की, 2 जनवरी को 65 वर्षीय वृद्ध की व 30 जनवरी को 55 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो चुकी है।
भीमगंजमंडी थाना क्षेत्र में 24 नवम्बर को 52 वर्षीय व्यक्ति, 3 दिसम्बर को 45 वर्षीय व्यक्ति की रेलवे स्टेशन के बाहर फुटपाथ पर, 24 दिसम्बर को 54 वर्षीय व्यक्ति की श्रीराम मंदिर रोड स्थित फुटपाथ पर व 23 जनवरी को 28 वर्षीय युवक की मौत हो चुकी है।
रामपुरा क्षेत्र में 3 दिसम्बर को 55 वर्षीय व्यक्ति व 11 दिसम्बर को 70 वर्षीय वृद्ध की मौत हो गई।
नयापुरा थाना क्षेत्र में 29 नवम्बर को 45 वर्षीय व्यक्ति की और 1 नवम्बर को 35 वर्षीय युवक की मौत हो चुकी है।
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तलाश अभियान पोर्टल पर जानकारी
पुलिस सूत्रों के अनुसार जितने भी अज्ञात लोगों के शव मिलते हैं या उनकी उपचार के दौरान मौत होती है। उनकी पहचान के लिए उसी दिन सभी थाना क्षेत्रों में जानकारी दी जाती है। 48 घंटे तक परिजनों की तलाश व इंतजार किया जाता है। इसके बाद पोस्टमार्टम करवाकर नगर निगम के जरिए लावारिस मानकर उनका अंतिम संस्कार करवा दिया जाता है। इसके बाद भी हर महीने ऐसे लोगों की सूची पुलिस के तलाश अभियान पोर्टल पर अपलोड की जाती है। जहां मुख्यालय में इनका रिकॉर्ड अपडेट होता है। इसके बाद केन्द्र तक यह जानकारी भेजी जाती है।
सर्दी ऐसे बनती है मौत का कारण
मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. मनोज सलूजा ने बताया कि तेज सर्दी कई बीमारियों को बढ़ा देती है, जो जानलेवा होती है। कमजोर शरीर के लोगों में फैफड़े का संक्रमण खतरनाक होता है। न्यूमोनिया से जान भी जा सकती है। अधेड़ और वृद्ध लोगों में सर्दी से रक्तचाप बढ़ जाता है। इससे पक्षाघात का खतरा रहता है। तेज सर्दी में दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। सांस की बीमारी और अस्थमा के रोगी के जीवन को भी खतरा बढ़ जाता है। फुटपाथ पर रहने वालों में यह सभी बीमारियां सामान्यत पाई जाती हैं। वे काफी कमजोर होते हैं और सर्दी से सीधा एक्पोजर होता है, जो उनके लिए खतरनाक होता है।Ó