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कोटा के इस दबंग अफसर ने नेताओं को बांध दिया शर्तों के बंधन में, अब नहीं कर पाएंगे मन की मर्जी!

कलक्टर ने सशर्त दिया नगरपालिका सांगोद को बालिका विद्यालय का भवन। जनप्रतिनिधियों की नहीं होगी मंशा पूरी। चाहते थे भवन में करना बदलाव। अब जैसी स्थिति में उसी में बैठकर करना होगा काम।
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Updated: 5 Jun 2018, 8:30 AM IST
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People will not be able to represent their mind! After all, what is it? Learn to read this news ...

सांगोद. राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के उच्च प्राथमिक विद्यालय भवन में स्थानान्तरित होने के बाद खाली भवन में नए सिरे से नगरपालिका कार्यालय संचालन की पालिका जनप्रतिनिधियों की मंशा पूरी होती नहीं दिख रही।
जिला कलक्टर ने बालिका स्कूल के इस भवन को नगरपालिका को हस्तान्तरित कर इसमें कार्यालय संचालन की स्वीकृति तो दे दी, लेकिन पालिका को ऐसी शर्तों में बांध दिया की वो इस भवन का अपनी मंशा अनुरूप उपयोग नहीं कर सकते। इसका उपयोग करने के लिए पालिका को मौजूदा भवन में बिना कोई तब्दीली किए ही कार्यालय संचालित करना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि बालिका स्कूल में जगह की तंगी महसूस होने पर इसे उच्च प्राथमिक स्कूल के भवन में स्थानान्तरण की कवायद शुरू हुई तो नगर पालिका ने जीर्ण-शीर्ण उच्च प्राथमिक स्कूल भवन की नए सिरे से मरम्मत करवाई और लाखों रुपए भी खर्च किए। जनप्रतिनिधियों को उम्मीद थी की बालिका स्कूल के स्थानान्तरित होने पर खाली हुए बालिका स्कूल का भवन नगर पालिका को हस्तान्तरित हो जाएगा और यहां नए सिरे से भवन बनाकर कार्यालय संचालित कर सकेंगे।

यहां मिली राहत
स्कूल भवन हस्तान्तरण सम्बंधी यह आदेश करीब तीन माह पहले जारी हो गया था, लेकिन मामला अब चर्चा में आया है। इस आदेश में तत्कालीन जिला कलक्टर रोहित गुप्ता ने उच्च प्राथमिक स्कूल भवन को बालिका स्कूल संचालन के लिए हस्तान्तरित कर दिया। ऐसे में इस सत्र से बालिका स्कूल का संचालन नए सिरे से तैयार उच्च प्राथमिक स्कूल भवन में शुरू होने की उम्मीद है।

यहां मिली निराशा
यहां तहसील कार्यालय के पास संचालित बरसों पुराने पालिका भवन में जगह की तंगी पर जनप्रतिनिधियों ने बालिका स्कूल को अपने अधीन लेने की कवायद शुरू की। इसके लिए पालिका ने लाखों रुपए भी खर्च किए। जनप्रतिनिधि यहां नए सिरे से भवन बनाकर कार्यालय संचालित करना चाह रहे हैं, लेकिन शर्तोयुक्त आदेश से जनप्रतिनिधियों की सारी उम्मीदों पर जैसे पानी फिर गया।
& जिला कलक्टर की शर्तों पर स्कूल भवन को नगरपालिका के अधीन ले लिया है। अब यहां क्या करना है और कैसे करना है यह तो आगामी दिनों में तय करेंगे। यह कस्बे के विकास का काम है। अच्छे कार्यों में बाधा आती है, लेकिन इससे घबराने के बजाय और ज्यादा नया करने का हौंसला मिलता है। पालिका कार्यालय बनता है तो इससे लोगों को भी राहत मिलेगी। जगह की तंगी से जूझ रहे पालिका कर्मचारियों को भी सहुलियत होगी।
देवकीनंदन राठौर पालिका अध्यक्ष ।

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