
कोटा. किसी बीमारी से मुक्ति पाने के लिए अब उपचार के लिए आयुर्वेद चिकित्सक से पहले ज्योतिषी के पास जाएं। आपका कौनसा ग्रह कमजोर है। किस नक्षत्र में गड़बड़ी है। इसके आधार पर वैद्य आपको यह बताएंगे कि किस औषधीय वनस्पति के सम्पर्क में रहने से लाभ होगा। सुनने में यह बात भले ही अजीब लगे, लेकिन कोटा में आयुर्वेद विभाग के एक वैद्य इस तरीके से उपचार कर रहे हैं। उनका दावा है कि इससे रोगियों को लाभ मिल रहा है। कई रोगी दो-चार दिन में ही स्वस्थ्य हो गए। इस उपचार में पैसे भी खर्च नहीं होते हंै। इसलिए रोगियों की इसमें रुचि बढ़ रही है।
विधायक की धमकी का खामियाजा भुगत रहे किसान...
वैद्य सुधीन्द्र शृंगी के अनुसार ग्रहों और नक्षत्रों का सीधा प्रभाव व्यक्ति की सेहत पर पड़ता है, जिससे वह बीमार हो जाता है। इसे दुरुस्त कर रोगी को स्वस्थ्य किया जा सकता है। शृंगी को ग्रहों और नक्षत्रों से वनौषधियों के संबंध की जानकारी चित्तौडगढ़़ में वन विभाग से मिली। इसके आधार पर उन्होंने उपचार शुरू किया।
ग्रह और पीड़ा
सूर्य : नेत्र रोग, सिरदर्द, ब्लडप्रेशर।
चन्द्र : मिर्गी के दौरे।
मंगल : बुखार, मस्तिष्क के रोग, गले के रोग।
बुध : माइग्रेन, श्वास के रोग, रक्तचाप, सफेद दाग।
गुरु : पीलिया, लीवर संबंधी रोग।
शुक्र : हैजा, अनिद्रा।
शनि : कब्जी, कमर व अन्य दर्द।
राहू : गठिया और अल्सर।
केतु : टीबी, त्वचा संबंधी रोग।
नक्षत्र के अनुसार
अश्विन : कुचीला
पुर्नवसु : बांस
चित्रा : बिल्वपत्र
उत्तराषढ़ा : कटहल
भरणां : आंवला
पुष्प : पीपल
स्वाति : अर्जुन
श्रवण : आक
अशखेषा : नागकेसर
विशाखा : काकोन
घनिष्ठा : खेजड़ी
मघा : बरगद
अनुराधा : मौलश्री
शतमिषा : कदम्ब
पूर्वाषढ़ा : जलवेतान
रेवती : महुआ
कृतिका : गूलर
राशि में ये फायदेमंद
मीन : बरगद
मेष : लाल चंदन
वृष : सप्तपर्णी
मिथुन : कटहल
कर्क : पलाश
सिंह : पाडल
कन्या : आम
तुला : मौलश्री
वृश्चिक : खैर
धनु : पीपल
मकर : शीशम
कुंभ : कैमर खैर