
कोटा. जिले के सुल्तानपुर कस्बे में बाल विवाह ( child marriage in ) होने की आशंका के चलते पुलिस व प्रशासन ने शनिवार रात एक सामूहिक विवाह सम्मेलन ( Mass Marriage Conference ) को ही रुकवा दिया। मामला क्षेत्र के तोरण ग्राम पंचायत के पड़ासलिया गांव का है। यहां बिना प्रशासन से स्वीकृति लिएभील समाज की ओर से विवाह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा था। सम्मेलन में कुल 28 जोड़ों का विवाह होना था, जिसमें करीबन आधा दर्जन जोड़े नाबालिग होने की सूचना मिली थी।
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इसी सूचना पर दीगोद तहसीलदार सत्यनारायण गुप्ता के निर्देशानुसार पटवारी, कानूनगों व पुलिस द्वारा सम्मेलन की निगरानी की गई। शनिवार दोपहर बाल विवाह नहीं करवाने को लेकर सम्मेलन कमेटी को पाबंद किया गया। इसके बाद भी शाम को सम्मेलन में बाल विवाह का अंदेशा देखकर निगरानी रखी गई। रात को सम्मेलन में पहुंची सुल्तानपुर थाना पुलिस ने विवाह जोड़ों से बालिग होने के दस्तावेज मांगे तो किसी के पास कोई दस्तावेज नहीं मिले। वहीं सम्मेलन कमेटी द्वारा भी दी गई जोड़ों की लिस्ट में कई गड़बडिय़ां मिली। जिस पर मौके पर ही सीआई अंजना नोगिया ने दीगोद एसडीएम कैलाशचंद शर्मा को स्थिति से अवगत करवाया। लेकिन सम्मेलन में काफी देर तक कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा। ऐसे में पुलिस क ो जोड़ों के परिजनों से समझाइश के लिए काफी मशक्त करनी पड़ी।
घंटों तक सम्मेलन कमेटी से समझाइश की गई और बाल विवाह होने पर दंड नियमों के बारे मे बताते हुए सख्ती से चेतावनी दी गई। तब जाकर सम्मेलन कमेटी ने विवाह तैयारियां रोकी। इस मौके पर पंडित व सम्मेलन कमेटी अध्यक्ष को भी बिना बालिग प्रमाणिकता के विवाह सम्पन्न नही करवाने के लिए पाबंद किया। यहां रातभर द्वितीय थानाधिकारी नारायण सिंह, हेड कांस्टेबल लखनलाल मय 4 जवानों के साथ ही कानूनगों पंकज मंत्री व पटवारी नेमीचंद यादव विवाह पर निगरानी रखे रहे। यहां पुलिस द्वारा दस्तावेज के अभाव में एक भी जोड़े का विवाह नहीं होने दिया गया, जिसके चलते बिन फेरो के ही सभी 28 जोड़े घर लौट गए।
पडासलिया गांव में भील समाज की ओर आयोजित विवाह सम्मेलन में बाल विवाह होने की सूचना कोटा कंट्रोल रूम से मिली। गांव पहुंच कर सम्मेलन में कार्रवाई की गई। वहां जोड़ों से बालिग होने के दस्तावेज नहीं पाए गए। लिस्ट में गड़बडिय़ां मिली। सम्मेलन कमेट के अध्यक्ष को पाबंद किया गया है।
अंजना नोगिया, सीआई सुल्तानपुर