कोटा

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए बजी खतरे की घंटी!, कैसे, पढि़ए खास रिपोर्ट…

लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद भाजपा और कांग्रेस के नेता दिनभर आंकड़ों के गणित में उलझे रहे। कांग्रेस के विधायक अपने क्षेत्र में उतने वोट नहीं डलवा सके, जितना जोर भाजपा विधायकों ने लगाया।
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May 01, 2019
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कोटा . लोकसभा चुनाव खत्म होने के दूसरे दिन मंगलवार को भाजपा और कांग्रेस के नेता दिनभर आंकड़ों के गणित में उलझे रहे। कार्यकर्ताओं के फीडबैक और मतदान के प्रतिशत को लेकर नेता जीत-हार का विश्लेषण करते रहे। मजेदार बात यह है कि कांग्रेस के विधायक अपने क्षेत्र में उतने वोट नहीं डलवा सके, जितना जोर भाजपा विधायकों ने लगाया। मतदान प्रतिशत में राज्य के नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल की कोटा उत्तर विधानसभा सीट, जिले की छह सीटों पर छठवें स्थान पर रही।


कांग्रेस प्रत्याशी रामनारायण मीणा पीपल्दा से विधायक हैं, वहां मतदान का प्रतिशत छह सीटों में पांचवा है। बढ़े हुए मतदान प्रतिशत से भाजपा खेमा जहां आराम की स्थिति में आज रहा, वहीं कांग्रेस में थोड़ी परेशानी रही। निर्वाचन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में सर्वाधिक मतदान का रेकॉर्ड रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र के नाम दर्ज हुआ। यहां 74.38 प्रतिशत मतदान हुआ है। विधानसभा चुनाव में भी रामगंजमंडी क्षेत्र में ही सर्वाधिक मतदान हुआ था।

जिले की छहों विधानसभा सीटों में विधानसभा चुनाव 2018 के मुकाबले मतदान का प्रतिशत घटा है। विधानसभा चुनाव की तुलना में जिले में सबसे कम मतदान सांगोद में हुआ। मजेदार बात यह है कि सांगोद में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सभा की थी। भरत सिंह वहां से विधायक है। वहीं विधानसभा चुनाव की तुलना में कोटा दक्षिण में सबसे अधिक मतदान हुआ है। यह ओम बिरला का गढ़ माना जाता है। उन्होंने इस क्षेत्र में प्रचार के लिए खुद कम समय दिया, लेकिन उनके समर्थक यहां मोर्चा संभाले रहे। विधायक संदीप शर्मा, नागरिक सहकारी बैंक के चेयरमैन राजेश बिरला समेत अनेक नेता इस क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे। कांग्रेस की ओर से राखी गौतम ने मोर्चा संभाल रखा था।

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कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं। जबकि कोटा जिले की छह विधानसभा सीटें इसमें आती है। अभी तीन विधायक भाजपा और तीन विधायक कांग्रेस के है। छहों विधानसभा क्षेत्र के मतदान के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पाया कि जो तीन विधानसभा सीटें भाजपा के कब्जे में है, वहां मतदान का प्रतिशत अधिक है। वहीं जिन तीन सीटों पर कांग्रेस के विधायक है वहां मतदान कम हुआ है।

मंत्री के घर में सबसे कम हुआ मतदान
भाजपा के कब्जे में मौजूदा रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र में 74.38 प्रतिशत मतदान हुआ है। जिले में पहले पायदान पर यह विधानसभा क्षेत्र रहा है। दूसरे नम्बर पर लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र में 70.71 फीसदी मतदान हुआ। तीसरे नम्बर पर कोटा दक्षिण विधानसभा क्षेत्र है। यहां 70.68 फीसदी मतदान हुआ। यह तीनों विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के विधायक निर्वाचित हैं। मतदान के लिहाज से चौथे नम्बर पर सांगोद रहा है। यहां 70.48 प्रतिशत मतदान हुआ।

विधायक भरत सिंह कांग्रेस और हीरालाल नागर ने भाजपा की ओर से कमान संभाल रखी थी। पांचवें नम्बर पर पीपल्दा विधानसभा क्षेत्र रहा है। यहां मतदान 67.99 फीसदी हुआ। कांग्रेस प्रत्याशी रामनारायण मीणा खुद यहां से विधायक है। अंतिम पायदान पर कोटा उत्तर विधानसभा क्षेत्र रहा है। यहां 67.83 प्रतिशत वोट डाले गए। यहां से स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल विधायक है। भाजपा को बुरी तरह पराजित किया था। जबकि इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने सभा तक की थी। कम मतदान होने से कांग्रेस की नींद उड़ गई है। वहीं भाजपा अधिक मतदान को अपने पक्ष में मान रही है।

संसदीय क्षेत्र में सबसे कम मतदान केशवरायपाटन में
आठों विधानसभा क्षेत्र के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर सामने आया कि सबसे कम मतदान केशवरायपाटन विधानसभा क्षेत्र में 66.05 प्रतिशत हुआ। इस सीट पर पुरुष मतदान 68.35 तथा महिला मतदान 63.58 प्रतिशत रहा है। बूंदी में 70.63 प्रतिशत मतदान हुआ। बूंदी जिले की यह सीट भाजपा के पास है।

Updated on:
01 May 2019 12:48 pm
Published on:
01 May 2019 12:48 pm