राजस्थान और मध्यप्रदेश को जोड़ने वाला कोटा-धरनावदा हाइवे अब जर्जर स्थिति में है, जो वाहन चालकों के लिए सिरदर्द बन चुका है।
Kota-Dharnawda Highway: कोटा-धरनावदा स्टेट हाइवे पर सांगोद से बपावर तक का सफर वाहन चालकों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन चुका है। इस हिस्से की सड़क पूरी तरह से जर्जर हो गई है, जहां जगह-जगह सड़कें टूटकर बिखरी हुई हैं और गहरे गड्ढे हो गए हैं।
वाहन चालकों को अब इन खस्ताहाल सड़कों पर सफर करते वक्त लगातार हिचकोले खाने पड़ रहे हैं, और इस दौरान दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। इसके बावजूद इस मार्ग पर वाहनों से टोल वसूली का सिलसिला लगातार जारी है।
आपको बता दें कि लगभग एक दशक पहले कोटा-धरनावदा मार्ग के सुधारीकरण के दौरान इस सड़क का चौड़ीकरण किया गया था। राजस्थान को मध्यप्रदेश से जोड़ने वाला यह मार्ग तकरीबन ढाई सौ करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ था। इसमें कोटा जिले के कैथून से लेकर सांगोद-बपावर होते हुए
बारां जिले के कवाई तक डामर सड़क का निर्माण किया गया था। इस मार्ग पर चौबीस घंटे भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। बीते एक दशक से आरएसआरडीसी विभाग सड़क पर टोल तो वसूल रहा है, लेकिन सड़क की मरम्मत की जिम्मेदारी से पीछे हट रहा है।
मार्ग के कैथून से सांगोद तक के हिस्से में कुछ साल पहले विभाग ने डामरीकरण कराया था, जिससे वाहन चालकों को राहत मिल रही है। लेकिन सांगोद से बपावर तक का हिस्सा अब पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। इस मार्ग पर भारी वाहनों का बोझ लगातार बढ़ने के बावजूद सड़क पर कोई ठोस मरम्मत नहीं की जा रही। हर साल बारिश के बाद गड्ढों को भरने का काम किया जाता है, लेकिन वह भी अस्थायी होता है, जिससे यह सड़क दिन-ब-दिन और खस्ता हो रही है।
सड़क पर बोरदा, गलाना और कवाई के पास तीन टोल नाके हैं, जिसमें एक नाका बोरदा गांव में भी है। इस 15 किलोमीटर के जर्जर हिस्से में वाहन चालकों को टोल चुकाना पड़ता है, जो इस खराब सड़क पर यात्रा करने के बावजूद उन्हें सही नहीं लगता। कई बार लोगों ने सड़क की मरम्मत की मांग की है, लेकिन इस पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
'सांगोद से बपावर तक सड़क की हालत बेहद खस्ता हो रही है। जगह-जगह सड़क उखड़ी हुई है, जिससे वाहन चालकों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। जल्द इसकी मरम्मत होनी चाहिए।'
नरोत्तम सुमन, वाहन चालक
'सड़क की खराब हालत के कारण वाहनों का मेंटेनेंस खर्च बढ़ गया है। बपावर से आगे बारां जिले में भी कई जगह सड़क जर्जर हो रही है। डेढ़ घंटे के सफर में अब दो से ढाई घंटे लगने लगे हैं, जिससे वाहनों का खर्चा भी बढ़ गया है।'
मांगीलाल प्रजापत, वाहन चालक