
कोटा. यातायात पुलिस की ओर से शहर में जगह-जगह बेतरतीब तरीके से रखे गए बेरीकेड्स व इनसे बनाए गए डिवाइडर लोगों की जान के लिए आफत बन गए है। ऐसे में आए दिन लोग इनसे टकराकर घायल हो रहे हैं। कोटा शहर में 12 लाख की आबादी है। हर दिन सड़कों पर लाखों लोग वाहनों से गुजरते हैं। ऐसे में रात के समय पुलिस के बेरीकेड्स उन्हें दिखाई नहीं देते और हादसों का शिकार हो जाते हैं।
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रात में नहीं आते नजर
पुलिस की ओर से शहर के प्रमुख चौराहों समेत सड़क के बीच में बेरीकेड्स लगाकर रास्ते बंद किए गए है, लेकिन अंधेरे में इन बेरीकेड्स के नजर नहीं आने से लोग इनसे टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे है। बेरीकेड्स पर रेडियम स्टीकर नहीं है। ऐसे में ये लाइट को रिफलेक्ट नहीं करते। इन पर रंगा गया पीला रंग भी काफी पुराना हो चुका है। ऐसे में रात में ये वाहन चालकों को नजर नहीं आते और वाहन चालक इनसे दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।
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यहां होती है सबसे अधिक दुर्घटनाएं
शहर में सर्किट हाऊस से नेहरू गार्डन तक डिवाइडर के रूप में बेरीकेड्स लगा दिए गए है। ये बेरीकेड्स कुछ मीटर की दूरी से भी नजर नहीं आते। इस पर इस सड़क पर अंधेरा होने व सड़क के संकरी होने से दुर्घटनाएं हो रही हैं। इसके अलावा अदालत चौराहे व अदालत चौराहे से गांवड़ी रोड पर सड़क के दोनों ओर खड़े बेरीकेड्स लगा दिए गए हैं। इससे भी दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है।
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बेरीकेड्स लगाकर रोके रास्ते
एरोड्राम चौराहे पर डीसीएम से जाने वाले चौपहिया वाहनों का रास्ता बेरीकेड्स लगाकर रोक दिया गया है। ऐसे में वाहन चालक को स्लीपलेन से होकर एयरपोर्ट के सामने से घूमकर जाना पड़ता है। एयरपोर्ट के सामने भी बेरीकेड्स लगाकर की गई वैकल्पिक व्यवस्था से भी आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। कोटड़ी चौराहे से गुमानपुरा जाने के मार्ग में चौराहे पर बेरीकेड्स लगे हैं।