परिवहन विभाग का उडऩदस्ते की अवैध वसूली 100-200 रुपए तक ही सीमित नहीं थी। एक रात में एक से डेढ़ लाख की कमाई होती थी।
एसीबी के एएसपी ठाकुर चंद्रशील ने बताया कि आटीओ के कर्मचारी हर ट्रक चालक से 500 से 2 हजार रुपए तक वसूलते हैं। आरटीओ कर्मियों ने रकम वसूलने के लिए भी एजेंट रख रखे थे। जिनके माध्यम से वसूली का खेल चलता है। जब एजेंट ट्रकों से वसूली कर रहा होता है तो उसके आगे और पीछे चल रहे बाइक सवार पूरी निगरानी करते हैं। यह एजेंट ट्रकों से वसूली गई रकम उड़नदस्ते की गाड़ी तक पहुंचाते हैं।
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लाखों कमाते हैं एक रात में
एएसपी चंद्रशील ने बताया कि जिस रात कोटा आरटीओ के दो उपनिरीक्षकों और चार सिपाहियों को दबोचा था, उस दिन भी ट्रकों से वसूली का खेल चरम पर था। एजेंटों के जरिए सभी ट्रकों से वसूली की जा रही थी। जो बाहर के ट्रक थे उनसे पांच से दस हजार रुपए मांगे जा रहे थे। जो लोग नहीं दे रहे थे उनकी बिल्टी और ट्रक की आरसी रखवा ली जा रही थी। तड़के कार्रवाई होने तक यह उड़न दस्ता करीब डेढ़ लाख रुपए की काली कमाई कर चुका था, लेकिन कार्रवाई की भनक लगते ही एक एजेंट करीब एक लाख रुपए लेकर फरार हो गया। जिसकी तलाश की जा रही है।
मुझसे मांगे थे पांच हजार
हिंडोली के बहादुरपुरा निवासी खलासी नंदकिशोर ने राजस्थान पत्रिका को बताया कि वह ट्रक चालक के साथ अक्सर जयपुर से कोटा माल लेकर आता है। रास्ते में अधिकतर जगहों पर परिवहन व ट्रेफिक पुलिस के सिपाही परेशान करते ही हैं। हर जगह पर उन्हें सौ-दो सौ रुपए देकर हम आगे बढ़ जाते हैं। हमने कई बार पैसे दिए हैं। शनिवार तड़के भी सरिये से भरा ट्रक लेकर कोटा आया, लेकिन जैसे ही कुन्हाड़ी पेट्रोल पम्प पर पहुंचे आरटीओ के उड़नदस्ते ने रोक लिया। बिल्टी और ट्रक की आरसी लेने के बाद ट्रक को ओवरलोड बताकर पांच हजार रुपए मांगे। मना करने पर बिल्टी रख ली। इससे पहले कुछ करते एसीबी ने छापा मारकर उन्हें पकड़ लिया।