कोटा

Shab-e-Barat Special: शब-ए-बारात पर ऐसे करें गुनाहों से तौबा, बरसेगी अल्लाह की रहमत

इस्लामी कैलेंडर के अनुसार यह रात साल में एक बार शाबान महीने की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है।
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Updated: 1 May 2018, 1:51 PM IST
shab-E- Barat

कोटा . इस्लामी कैलेंडर के अनुसार यह रात साल में एक बार शाबान महीने की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है। शब-ए-बारात दो शब्दों, शब और बारात से मिलकर बना है, जहां शब का अर्थ रात से है वहीं बारात का मतलब बरी होना है। यानि अपने गुनाहों से बरी होने की रात शब-ए-बारात कही जाती है।

हाफिज नवीर अहमद ने बताया कि यह रात साल में एक बार शाबान महीने की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है। मुसलमानों के लिए यह रात बेहद फजीलत ;महत्वपूर्णद्ध रात मानी जाती हैए इस दिन विश्व के सारे मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं। वे दुआएं मांगते हैं और अपने गुनाहों की तौबा करते हैं।

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मोहम्मद कलीम ने बताया कि इबादत, तिलावत और सखावत (दान-पुण्य) के इस त्योहार पर मस्जिदों और कब्रिस्तानों में खास सजावट की जाती है। मस्जिदों व घरों पर विशेष रोशनी की जाती है। वहीं, बुजुर्गों व अजीजों की कब्रों पर चिरागा कर दुरूद और दुआओं के साथ इसाल-ए-सवाब पेश किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस रात मुस्लिमजन अपने उन परिजनों, जो दुनिया से रूखसत हो चुके हैं, उनकी मगफिरत की दुआएं की जाती है।

यह अरब में लैलतुल बराह या लैलतुन निसफे मीन शाबान के नाम से जाना जाता है। जबकि, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ईरान, अफगानिस्तान और नेपाल में यह शब-ए-बारात के नाम से जाना जाता है।

यह हैं 4 मुकद्दस रातें
शब ए बारात इस्लाम की 4 मुकद्दस रातों में से एक है। जिसमें पहली आशूरा की रात दूसरी शब-ए-मेराज, तीसरी शब-ए-बारात और चौथी शब-ए-कद्र होती है।

ऐसे करें गुनाहों से तौबा
मौलाना कलीम बताते हैं यह रात पूर्व में किए गए कर्मों का लेखा जोखा तैयार करने और आने वाले साल की तकदीर तय करने वाली मानी जाती है।

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इस रात सलातु तस्बीह की नमाज पढऩा विशेष होता है। इस नमाज से बंदे के हर गुनाह माफ हो जाते हैं। दीन और दुनिया की बरकतें मिलती हैं। अल्लाह की 300 बार तस्बीह पढऩे पर बंदे की सारी तकलीफें दूर व गुनाह माफ हो जाते हैं। सलातु तस्बीह की नमाज इंसान को जिंदगी में एक बार, साल में, महीने में और हो सके तो सप्ताह में एक बार जरूर पढऩा चाहिए।

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