कोटा

राजस्थान में मिली भगवान गणेश के नारी अवतार की प्रतिमाएं

मंदाकिनी मंदिर की बाहरी दीवारों पर स्थापित हैं देवी गणेश्वरी और विनायकी प्रतिमाएं। एक हजार साल से ज्यादा पुरानी हैं गणेश के नारी अवतार की यह प्रतिमाएं। गिनी-चुनी जगह ही मिलती है इनकी गणेश के देवी अवतार की मौजूदगी।

2 min read
Oct 11, 2018
Statues of the female incarnation of god Ganesha found in Rajasthan

कोटा.

अर्धनारीश्वर भगवान शिव ही नहीं सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु से लेकर देवताओं के राजा इंद्र, विष्णु अवतार कृष्ण और उनके शिष्य अर्जुन तक को किसी न किसी वजह से स्त्री रूप धारण करना पड़ा था, लेकिन यह बात बेहद कम ही लोग जानते हैं कि भगवान गणेश का भी स्त्री रूप है, जिसे विनायकी और गणेश्वरी के नाम से जाना जाता है। गणेश के स्त्री अवतार की एक हजार साल से ज्यादा पुरानी प्रतिमाएं बिजौलिया के मंदाकिनी मंदिर में मौजूद हैं, लेकिन पुरातत्व के पन्नों पर इन्हें अभी तक जगह नहीं मिली है।

चौहानवंशीय राजाओं ने कराई थी स्थापना

चौहान वंश के राजाओं ने 10वीं से लेकर 13वीं शताब्दी के बीच बिजौलिया के मंदिरों की स्थापना कराई थी। इनमें सबसे खास है मंदाकिनी या मीक्षाक्षी मंदिर। स्थापत्य कला के साथ ही इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है मंदिर की बाहरी दीवारों पर स्थापित भगवान गणेश के स्त्री रूपी अवतार की दो प्रतिमाएं। जिन्हें स्थानीय लोग विनायकी और गणेश्वरी या गणेशी (नारीगणेश) के नाम से पुकारते हैं। इन प्रतिमाओं के चार हाथ हैं। हाथों में गणेश की तरह ही फरसा, गदा, मोदक आदि है। सूंड बायीं ओर मोदक थाल पर लगी है। मूर्ति की देह नारी के समान है।


नहीं हुआ डॉक्यूमेंटेशन

ऑर्कलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया का कोटा सब सर्किल इन मंदिरों की सार संभाल करता है, लेकिन अभी तक गणेश के नारी स्वरूपों का डॉक्यूमेंटेशन नहीं हो सका है। जबकि विनायकी रूप की मूर्तियां तमिलनाडु के चिदंबरम मंदिर, जबलपुर के पास चौसठ योगिनी मंदिर, मंदसौर के हिंगलाजगढ़ के अलावा बनारस आदि प्राचीन शहरों में ही देखने को मिलती है। सभी जगह एक ही प्रतिमा है, लेकिन मंदाकिनी मंदिर में नारीगणेश की दो प्रतिमाएं होने के बावजूद अभी तक यह अपनी पहचान को जूझ रही हैं।


ऐसे हुआ गणेश का स्त्री अवतार

मत्स्य पुराण और विष्णु धर्मोत्तर पुराण में बताया गया है कि जब राक्षस अंदोक (अंधक) माता पार्वती का अपहरण करने की कोशिश कर रहा था तब भगवान शिव का त्रिशूल माता पार्वती को लग गया। इस कारण जो रक्त जमीन पर गिरा वो स्त्री और पुरुष दो भागों में विभाजित होकर आधी स्त्री और आधा पुरुष का रूप ले लिया जिसे गणेशानी के नाम से जाना गया। कुछ अन्य ग्रंथों जैसे लिंगपुराण और दुर्गा उपनिषद में भी भगवान गणेश के स्त्री अवतार का उल्लेख किया गया है।

मान्यता यह भी है

जिस तरह विष्णु की शक्ति वैष्णवी, शिव की शिवा, ब्रह्मा की ब्रह्माणी शक्ति के रूप में जाना जाता है। ठीक वैसे ही गणेश की शक्ति को गणेश्वरी के रूप में माना और पूजा जाता है। नारी गणेश को गणेशी, गजानना, हस्तिनी, वैनायिकी, विघ्नेश्वरी, गणेश्वरी, गणपति हृदया, श्री अयंगिनी, महोदरा, गजवस्त्रा, लंबोदरा, महाकाया आदि नामों से भी जाना जाता है।

ये भी पढ़ें

हाड़ौती में भी मौजूद थे डायनासोर
Published on:
11 Oct 2018 12:09 pm
Also Read
View All