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1 मई से कोटा के इस अस्पताल में होगा बड़ा बदलाव, जानें डॉक्टर और मरीजों के लिए जरूरी नियम

Changes From 1 May 2026: कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में 1 मई से आपातकालीन सेवाओं में महत्वपूर्ण बदलाव किए जाएंगे। यह कदम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू होगा, जिसका उद्देश्य मरीजों को बेहतर और त्वरित उपचार प्रदान करना है।

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कोटा

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Akshita Deora

Apr 30, 2026

Kota Medical College

नवीन चिकित्सालय में आपातकालीन सेवाओं के लिए नई एसओपी की जानकारी देते प्राचार्य डॉ. निलेश जैन (फोटो: पत्रिका)

Kota Medical College Hospital: कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में आपातकालीन सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा। यह व्यवस्था 1 मई से लागू हो जाएगी। यह कार्य पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगा। यदि यह कार्य सफल रहा तो दो से तीन माह के अंदर एमबीएस अस्पताल में आपातकालीन सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. निलेश जैन ने बताया कि नए अस्पताल में आपातकालीन सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए नई एसओपी जारी कर दी गई। इससे मरीजों की भर्ती प्रक्रिया सुगम होगी।

ओपीडी गेट पर 24 घंटे रिसीविंग ट्रॉलीमैन मरीजों को त्वरित उपचार के लिए चिकित्सक तक पहुंचाएंगे। सभी स्टाफ (चिकित्सक, नर्सिंग, ट्रॉलीमैन) के लिए गणवेश व पहचान पत्र अनिवार्य होगा। अस्पताल अधीक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके अस्पताल में आवश्यक दवाओं का कम से कम तीन माह भण्डारण सुनिश्चित रहे।

यदि दवाओं का स्टॉक कम है तो अधीक्षक अपने स्तर पर उन दवाओं की उपलब्ध सुनिश्चित करेंगे। साथ ही किसी भी भर्ती मरीज को बाहर से दवा लाने के लिए नहीं कहा जाएगा। इमरजेंसी वार्ड में सीएमओ व चिकित्सकों के नाम-नंबर डिस्प्ले बोर्ड पर दिखेंगे।

भर्ती मरीज को अलग से पर्ची नहीं दी जाएगी

अस्पताल में भर्ती मरीजों को अलग से पर्ची नहीं देकर भर्ती टिकट के निर्धारित कॉलम में लिखी जाएगी। जिसे एक लैबकर्मी वार्ड में आकर ही सेम्पल लेगा और जांच होने के बाद रिपोर्ट भी उसी वार्ड में लाकर देने की व्यवस्था संबंधित चिकित्सालय अधीक्षक द्वारा की जाएगी।

डायग्नोस्टिक ब्रांच का एक चिकित्सक व एक लैब कर्मी 24 घंटे लैब में उपिस्थति रहेंगे। मरीज की जांच के बाद यदि अन्य विशेषज्ञ की आवश्यकता हो तो ड्यूटी सीएमओ संबंधित चिकित्सक के सम्पर्क करेगा।

24 घंटे से ज्यादा कोई भी मरीज आपातकालीन वार्ड में भर्ती नहीं होगा

सीमएओ यह सुनिश्चित करेंगे कि कौनसा मरीज वार्ड में शिफ्ट करने योग्य है। सीमएओ अपनी ड्यूटी के समाप्त होने पर आने वाले दूसरे सीएमओ को वार्ड में भर्ती प्रत्येक मरीज के संबंध में व्यक्तिश: जानकार देकर ही प्रस्थान करेंगे। जिससे आने वाले सीमएओ को वार्ड में भर्ती मरीजों के उपचार के संबंध में आवश्यक जानकारी रहे। सीएमओ को निर्देशित किया जा चुका है कि 24 घंटे से ज्यादा कोई भी मरीज आपातकालीन वार्ड में भर्ती ना रहे, उन्हें संबंधित वार्ड में शिफ्ट किया जाए।

उपचार पर्ची पर चिकित्सक का नाम स्पष्ट होगा, फीडबैक फॉर्म भी भरवाया जाएगा

आपातकालीन आउटडोर में आने वाले मरीजों के उपचार पर्ची पर चिकित्सक स्पष्ट रूप से अपना नाम अंकित करना सुनिश्चित करेंगे। आपातकालीन सेवाओं के प्रभारी डॉ. सुनील मीणा (सह-आचार्य, सर्जरी विभाग) और सह-प्रभारी डॉ. कल्प शांडिल्य (सहायक आचार्य, न्यूरोसर्जरी विभाग) नियुक्त किया है। वहीं, मरीज से उपचार की सेवाओं में निरंतर सुधार के लिए समय-समय पर मरीजों से फीडबैक फॉर्म भी भरवाया जाएगा।