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उदयपुर। आरएनटी मेडिकल कॉलेज अधीन संचालित संभाग के सबसे बड़े टीबी एवं चेस्ट अस्पताल, बड़ी के चिकित्सकों ने जटिल और जोखिम भरे मामले में 17 वर्षीय युवक की श्वास नली से 32x4 मिमी का लोहे का स्क्रू निकालकर उसे नया जीवन दिया।
यह प्रोसिजर बिना चीर-फाड़ और बिना जनरल एनेस्थीसिया के संपन्न किया। मरीज को शनिवार को अस्पताल में भर्ती किया था। स्थिति की गंभीरता देखते हुए चिकित्सकों ने तुरंत जांच कर रविवार को ‘फ्लेक्सिबल ब्रान्कोस्कोपी’ तकनीक से सफल प्रक्रिया को अंजाम दिया।
सहायक प्रोफेसर डॉ. महेश माहिच ने बताया कि युवक सुथारी का काम करते समय गलती से लंबा स्क्रू निगल गया, जो दाहिने फेफड़े की श्वास नली में फंस गया। इससे मरीज को तेज खांसी, छाती में दर्द और बलगम में खून आने जैसी गंभीर समस्याएं होने लगीं। समय रहते उपचार न मिलने पर स्थिति जानलेवा भी हो सकती थी।
सीनियर प्रोफेसर डॉ. महेन्द्र कुमार बैनाड़ा के मार्गदर्शन में टीम ने जटिल प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्यतः ऐसे मामलों में मरीज को बेहोश कर सर्जरी या रिजिड ब्रान्कोस्कोपी की जरूरत होती है, पर टीम ने अत्याधुनिक ‘फ्लेक्सिबल ब्रान्कोस्कोपी’ का उपयोग कर न्यूनतम जोखिम में ही फंसी वस्तु को बाहर निकाल लिया।
इस सफलता पर आरएनटी मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. राहुल जैन ने चिकित्सकों की सराहना करते हुए कहा यह उपलब्धि संस्थान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि बिना बेहोशी और बिना ऑपरेशन के इतनी जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक करना चिकित्सकीय टीम की उच्च स्तरीय दक्षता को दर्शाता है।
आरएनटी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में अब फॉरेन बॉडी रिमूवल जैसी जटिल प्रक्रियाएं भी आधुनिक तकनीक से की जा रही हैं, जो आमजन के लिए बड़ी राहत है।
इस सफल प्रक्रिया में डॉ. महेन्द्र कुमार बैनाड़ा, डॉ. महेश माहिच, एसआर डॉ. प्रकाश बिश्नोई, डॉ. भावना, डॉ. हेमकरण, डॉ. गोविन्द, डॉ. राहुल, नर्सिंग अधिकारी गीता एवं ओटी स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
Updated on:
29 Apr 2026 01:42 pm
Published on:
29 Apr 2026 01:42 pm
