
यूडीए मंत्री को ज्ञापन देकर समस्या से अवगत करवाते विधायक व पेराफेरी संघर्ष समिति के कार्यकर्ता
उदयपुर. शहरी सेवा शिविरों में पट्टा जारी करने के लिए पुराने दस्तावेज की अनिवार्यता हजारों परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। यूडीए पेराफेरी क्षेत्र के करीब 50 गांवों के अधिकांश निवासियों के पास पूर्व में कभी पट्टे जारी नहीं हुए, जिसके चलते वे वर्तमान शिविरों में भी पट्टा प्राप्त करने से वंचित हो रहे हैं। पेराफेरी संघर्ष समिति ने मांग की है कि वर्ष 2022 की तर्ज पर वैकल्पिक दस्तावेज के आधार पर वर्ष 2018 तक की बसावट को मान्यता देकर पट्टे जारी किए जाएं। समिति का कहना है कि इस संबंध में नियमों में शिथिलता प्रदान की जाती है तो नगर निगम एवं यूडीए पेराफेरी क्षेत्र के हजारों परिवारों को स्थायी राहत मिल सकेगी।
इसी मांग को लेकर रविवार को संघर्ष समिति ने ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा के नेतृत्व में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा, स्वायत्त शासन विभाग के सचिव रवि जैन एवं निदेशक नगरीय निकाय को ज्ञापन सौंपा।
पहाड़ी व आदिवासी बसावट वाले गांवों को बाहर रखें
विधायक फूल सिंह मीणा ने यूडीए पेराफेरी क्षेत्र में शामिल पहाड़ी एवं आदिवासी बसावट वाले गांवों को इस दायरे से बाहर रखने की मांग भी उठाई। इस पर मंत्री ने जिला कलक्टर से पुनः रिपोर्ट तलब की है। पूर्व गिर्वा प्रधान तख्त सिंह शक्तावत ने कहा कि वर्षों से लंबित इस समस्या के समाधान का यह उपयुक्त समय है और सरकार को आमजन के हित में ठोस निर्णय लेना चाहिए।
शिथिलता मिलने पर हजारों परिवारों को होगा लाभ
संघर्ष समिति का कहना है कि वर्तमान नियमों के तहत आबादी भूमि पर धारा 69-ए में पट्टा लेने के लिए पुराने पट्टों की मांग की जा रही है, जबकि स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत भी अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग से वर्ष 1996 तथा सामान्य वर्ग से वर्ष 1990 पूर्व के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। जबकि वर्ष 2022 में वैकल्पिक दस्तावेज के आधार पर वर्ष 2018 तक की बसावट वाले परिवारों को पट्टे प्रदान किए जा चुके हैं। ऐसे में पुनः शिथिलता देकर हजारों परिवारों को राहत दी जा सकती है।---
सरकार के समक्ष रखी गईं प्रमुख मांगें
नगर निगम में शामिल नए गांवों की सम्पूर्ण भूमि को सरकारी सर्कुलर के अनुसार शीघ्र गैरमुमकिन आबादी दर्ज किया जाए।
4 जनवरी 2022 के आदेश की पालना में आबादी से सटी एवं पहले से बसी भूमि को संबंधित पंचायत अथवा नगर निगम के नाम आबादी दर्ज किया जाए, जिससे शिविरों में पट्टे जारी किए जा सकें।
- मास्टर प्लान लागू होने से पूर्व विकसित हो चुकी आबादी को ग्रीन जोन से बाहर कर नियमितीकरण का मार्ग प्रशस्त किया जाए।
Updated on:
15 Jun 2026, 5:57 PM IST
Published on:
15 Jun 2026, 5:56 PM IST
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