
कोटा . पिछले दिनों नगर निगम के अधिकारी सड़कों पर उतरे। दावा किया गया कि वे आवारा मवेशियोंको पकड़ कर गौशाला तक पहुंचाएंगे। नगर निगम ने मंगलवार को दावा किया कि उन्होंने शहर की सड़कों से 57 मवेशी पकड़े, रात को शहर की प्रमुख सड़कें खाली भी दिखीं। सुबह होने के साथ ही कहानी फिर वही थी। सड़कों पर आवारा मवेशी धमाचौकड़ी करते यहां-वहां दिखे। ( Stray cattle Terror ) मुख्यमार्गों से इतर गलियों में बड़ी संख्या में मवेशी दिखे।
श्रीनाथपुरम-आरकेपुरम-विवेकानंद नगर जैसे बाहरी इलाकों में इनकी संख्या अचानक से बढ़ गई। इसकी वजह नगर निगम की कार्रवाई थी जो मुख्य मार्गों से मवेशियों को हटाने के लिए की गई। निगम की टीम ने मवेशियों को पकड़ा तो कम, उन्हें गलियों और बाहरी इलाकों में ज्यादा खदेडा। नतीजतन समस्या मुख्य सड़कों से निकल कर गलियों और उपनगरीय इलाकों तक पहुंच गई। हालात यह हैं कि अब भी आवारा मवेशियों से चोटिल हो कर लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं।
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शहर का आंखों देखा हाल
पत्रिका टीम ने जब रात को इस समस्या का जायजा लिया तो हालात विकट ही थे। जगह-जगह पसरे मवेशियों के कारण रोज हादसे हो रहे हैं। लोग घायल होकर सरकारी और निजी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। रंगपुर आरओबी पर रात-दिन बड़ी संख्या में मवेशी खड़े रहते हैं, इस कारण वहां कई बार जाम लग जाता है। माल डिब्बा मरम्मत कारखाने के सामने रात में वाहनों के निकलने की भी जगह नहीं बचती। यहां बड़ी संख्या में मवेशी सड़क पर जमे रहते हैं।
मवेशियों की समस्या को लेकर सोमवार को विधायक भरत सिंह ने मवेशियों की समस्या पर संभागीय आयुक्त को पत्र लिखा था। उन्होंने प्रशासन और निगम पर तंज कसते हुए कहा था कि हवाईअड्डे पर हवाई जहाज तो आते नहीं, ऐसे में तीन माह इसी काम में इसका उपयोग किया जाए। हवाई अड्डे की घास खत्म हो जाएगी और लोगों को राहत भी मिल जाएगी। सड़कों पर हादसे भी नहीं होंगे।
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सोमवार रात 10.30 बजे दादाबाड़ी चौराहा
दादाबाड़ी बड़ा चौराहा पर तैनात होमगार्ड, पुलिस के जवान। वहां से गुजरते वाहनचालक एकाएक ठहर गए। माजरा समझ में आता उससे पहले ही एक गाय दौड़ती हुई आई। उसके पीछेे हाथों में डंडे लिए करीब एक दर्जन युवक। गाय स्कूटी सवार से टकराते-टकराते बची। रात का समय था, चौराहे पर अंधेरा था। एक गाय को पकडऩे में युवकों का पसीना छूट गया। चौराहे पर जमा लोग नगर निगम के कर्मचारी थे जो सड़कों पर डटे आवारा मवेशियों को पकडऩे में जुटे थे। दो ट्रेक्टर ट्रॉली जिनमें मवेशियों को भर रखा था। इस दौरान गाय और कर्मचारी आपस में कई बार भिड़ते नजर आए।
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सोमवार रात 12.15 बजे ञ्च सीएडी सर्किल/एरोड्राम
करीब दो घंटे पहले आवारा मवेशियों को पकडऩे के लिए निगम टीम ने जो जहमत उठाई, उससे साफ था कि हालात कुछ तो बदलेंगे। हुआ भी ठीक वैसाद्ध एरोड्राम चौराहे से सीएडी के बीच मिलने वाले मवेशियों की संख्या 100-125 से घटकर 10-15 ही रह गई। हालांकि, रोज की तरह मवेशियों की रखवाली करने वाली श्वानों की फौज सड़कों पर तैनात रही। इसके बाद जैसे ही नए कोटा की तरफ बढ़े, नजारा बदल गया। वजह भी साफ थी, मुख्य चौराहों और सड़कों से मवेशियों को हटाने की जगह निगम दस्ते ने उन्हें गलियों और कम आबादी वाले क्षेत्र की तरफ धकेल दिया था। केशवपुरा, संतोषी नगर से श्रीनाथपुरम जाने वाली सड़क पर 200 से ज्यादा मवेशी दिखाई दिए।
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मंगलवार दोपहर 3 बजे ञ्च डीसीएम रोड से महावीर नगर तक
डीसीएम रोड से सीएडी होते हुए महावीर नगर तृतीय चौराहे तक सड़कों पर हर तरफ आवारा मवेशी नजर आए। सीएडी चौराहे पर आला अफसरों के दफ्तर होने से वे वहां तो नहीं दिखे, लेकिन मोदी कॉलेज रोड पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर के नीचे, केशवपुरा से महावीर नगर के रास्ते में यहां-वहां मवेशियों का आवारापन लोगों को सताता रहा। यही हाल तलवंडी की सड़कों का था। यहां भी मुख्य सड़क पर गाय और सांडों का कब्जा था। संतोषीनगर चौराहे से महावीर नगर विस्तार योजना मार्ग पर भी मवेशियों की भरमार थी।